मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ के न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने अतिथि शिक्षक राकेश सिंह जाटव की याचिका को स्वीकार करते हुए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी सूची को निरस्त कर दिया है।
यह भी किया स्पष्ट
नियुक्ति से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस नियुक्ति में पहले से कार्यरत अतिथि विद्वानों को प्राथमिकता दी जाए। बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सबसे पहले अतिथि विद्वानों से आवेदन आमंत्रित किए गए। इसके बाद नियुक्ति के संबंध में एक सूची जारी की गई।
न्यायालय को दी गई यह जानकारी
न्यायालय को बताया गया कि विभाग की ओर से जारी सूची में पूर्व में कार्यरत कुछ ही अतिथि विद्वानों को शामिल किया गया, जबकि सूची में सभी को शामिल करना चाहिए था।
न्यायालय ने जताई तर्क पर सहमति
इस कार्य को 17 दिसंबर 2019 को जारी सर्कुलर के विरुद्ध बताया गया। न्यायालय को इस बात से भी अवगत कराया गया कि जो अतिथि विद्वान पूर्व से कार्य कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता न देते हुए नए सिरे से अतिथि विद्वानों की भर्ती करना पूर्णतः मनमाना और अवैध निर्णय है। तर्क पर सहमति जताते हुए उच्च न्यायालय ने विभाग की उस सूची को ही निरस्त कर दिया।
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