मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी ने बड़ा फेरबदल किया है। जिसके बाद पार्टी ने पीसीसी चीफ की कमान जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई जिम्मेदारियां मिलने पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री और सीनियर लीडर सज्जन सिंह वर्मा का बड़ा बयान सामने आया है जिसने एक बार फिर चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है।
‘आलाकमान ये निर्णय पहले ले लेता तो आज परिणाम कुछ और होते’
जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनने पर सज्जन वर्मा ने कहा कि यह निर्णय स्वागत योग्य है इस निर्णय से बहुत खुश हूं। यह निर्णय आला कमान को बहुत पहले ले लेना था तो विधानसभा चुनाव के परिणाम कुछ और होते। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के लिए दिल्ली में कई पद खाली पड़े हैं। अब उन्हें वहां बैठकर प्रदेश की राजनीति में युवाओं को मार्गदर्शन देना चाहिए। आलाकमान से कहना चाहता हूं , इस तरह के निर्णय लेने से डरना नहीं चाहिए। बीजेपी की तरह निर्णय लेने की हिम्मत कांग्रेस भी दिखाए।
मध्यप्रदेश में मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सज्जन वर्मा ने कहा बीजेपी के इस निर्णय का वह स्वागत करते हैं और तारीफ भी। हमारे बीच के ही किसी साथी को मुख्यमंत्री बनाया है। मध्य प्रदेश नहीं बल्कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी ने मुख्यमंत्री बनाने में अच्छा निर्णय लिया है। कांग्रेस भी अब सेकेंड लाइन तैयार कर रही है।
आगे वर्मा ने कहा कि राम मंदिर के उद्घाटन में देश के प्रमुख पांच महामंडलेश्वर को बीजेपी ने न्यौता नहीं दिया है। धर्म को चलाना राजनेताओं की ठेकेदारी नहीं। कांग्रेस ईवीएम से चुनाव लड़ने से पहले देश के सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करेगी। आगे उन्होंने कहा कि ईवीएम से नहीं वैलेट पेपर से कराए चुनाव जाएं। बीजेपी के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय प्रहलाद पटेल नरेंद्र सिंह तोमर यह भी कांग्रेस की तरह अब मार्गदर्शन मंडल की भूमिका में रहेंगे।
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