नए साल के जश्न के लिए अगर आप भी जगह तलाश कर रहे हैं तो मध्य प्रदेश का जाम गेट एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. यहां आप प्रकृति के अद्भुत नजारों के बीच जश्न का लुत्फ उठा सकते हैं. परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक मना सकते हैं. जाम गेट से ऊपर विश्व के एकमात्र महिषासुर मर्दिनी माता पार्वती के मंदिर में दर्शन भी कर सकते हैं.
खरगोन की सीमा पर विंध्याचल पर्वत की चोटी पर यह जाम गेट मौजूद है. निमाड़-मालवा की सीमा पर बने ऐतिहासिक जाम गेट और हरियाली की चादर ओढ़े निमाड़ की खूबसूरती यकीनन आपका मन मोह लेगी. जाम गेट का नजारा किसी हिल स्टेशन से कम नहीं है. यहीं वजह है कि देश-विदेश से घूमने के लिए लोग यहां आते हैं.
रोमांच से भर देगा सफर
महू मंडलेश्वर स्टेट हाईवे पर स्थित जाम गेट पहुंचने के लिए घने जंगल के बीच घाट सेक्शन में करीब 8 KM की घुमावदार सड़क से जब आप सफर करेंगे तो निश्चित ही हर मोड़ पर रोमांचित हो उठेंगे. पहाड़ों से गिरते झरने, जंगलों के बीच छोटी-छोटी नदियां. हरे-भरे वृक्ष, सड़क किनारे लगी रेलिंग और पत्थरों पर बैठे बंदर तस्वीरें लेने पर मजबूर कर देंगे.
इन्होंने बनवाया था जाम गेट
इतिहासकारों की मानें तो जाम गेट का निर्माण होलकर शासन काल में देवी अहिल्या बाई होलकर द्वारा करवाया गया था. इंदौर से अपनी राजधानी महेश्वर जाने के लिए वह इसी मार्ग का इस्तेमाल करती थीं. गेट का निर्माण ऐसे मोड़ पर किया गया है, जहां से निमाड़ और मालवा दोनों सीमाओं पर नजर रखी जा सके. वर्तमान में यह ऐतिहासिक जाम गेट एमपी पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है.
ऐसे पहुंचें जाम गेट
जाम गेट पहुंचने के दो रास्ते हैं. पहला खरगोन से मंडलेश्वर और फिर बागदरा होते हुए जाम गेट पहुंचा जा सकता है. वहीं इंदौर से आंबेडकर नगर महू और फिर यहां से मेंण होते हुए जाम गेट पहुंच सकते हैं. इंदौर से जाम गेट की दूरी करीब 50 KM है. वहीं मंडलेश्वर से जाम गेट की दूरी महज 25 KM है. इस गूगल लोकेशन की मदद से भी आप आसानी से जाम गेट पहुंच सकते हैं.
Comments (0)