सोमवार शाम को भोपाल के अशोका होटल में कांग्रेस की विधायक दल की बैठक और डिनर डिप्लोमेसी आयोजित की गई। जिसमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे कांग्रेस विधायक अजय सिंह, रामनिवास रावत समित कई विधायक इस बैठक में मौजूद रहे। इसपर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा कि, विधायकों से मेल मुलाकात होंगी ,आगे के काम को लेकर चर्चा की जाएंगी फिर साथ में डिनर करेंगे। साथ ही साथ इस बैठक में कमलनाथ के न होने पर बोले, कमलनाथ जी विदेश गए है,अगर वो यहां होते तो जरूर आते।
कांग्रेस ने पीढ़ी परिवर्तन की तरफ कदम बढ़ाया
दरअसल, मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने पीढ़ी परिवर्तन की तरफ कदम बढ़ाया है। तेज तर्रार नेता उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनाकर कांग्रेस ने कई सियासी मैसेज दिए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उमंग को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन कई सीनियर नेताओं को दरकिनार करते हुए उमंग को ही नेता प्रतिपक्ष के लिए क्यों चुना गया, इसके पीछे कई कारण हैं। उमंग ने केवल राहुल गांधी के भरोसे पर खरे उतरे हैं बल्कि राज्य की जातिगत समीकरणों में भी फिट बैठे हैं।
जातिगत समीकरण
मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वर्ग सबसे अहम माना जाता है, राज्य की 47 विधानसभा सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं, जबकि 100 सीटों पर इस वर्ग का सीधा प्रभाव रहता है। ऐसे में कांग्रेस ने उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनाकर इस वर्ग को साधने की कोशिश की है। खास बात यह है कि 2018 के चुनाव में आदिवासी वर्ग का साथ मिलने से कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता में वापसी करने में सफल रही थी। लेकिन 2023 में इस वर्ग का साथ फिर से छूटा है, जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ है, ऐसे में कांग्रेस उमंग सिंघार के द्वारा 2023 के नुकसान की भरपाई 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में करने की पूरी कोशिश करना चाहेगी। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने हर वर्ग को कुछ न कुछ दिया है। लेकिन अब तक आदिवासी वर्ग को बड़ा पद प्रदेश में नहीं मिला है। ऐसे में कांग्रेस उमंग सिंघार को आगे किया है।
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