रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार द्वारा शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 पर लगातार बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। 9 जून को शुरू हुई इस हेल्पलाइन पर सिर्फ पांच दिनों के भीतर 15 हजार 434 शिकायतें दर्ज की गई हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन, बिजली, पानी, सड़क, नाली और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हुई हैं। इसको लेकर अब प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
राजस्व विभाग से जुड़ी सबसे ज्यादा शिकायतें
आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक शिकायतें राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित हैं। नामांतरण, सीमांकन और भूमि विवाद जैसे मामलों की कुल 2470 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इसके अलावा नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़े 2058 मामलों में सड़क, नाली, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं की शिकायतें शामिल हैं।
ऊर्जा विभाग से संबंधित 1921 शिकायतें बिजली आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट की समस्याओं को लेकर दर्ज की गई हैं। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी 1509 और खाद्य विभाग से संबंधित 1235 शिकायतें भी हेल्पलाइन तक पहुंची हैं।
आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी समस्याएं बनी बड़ी चिंता
सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज अधिकांश शिकायतें उन समस्याओं से जुड़ी हैं जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। जमीन संबंधी विवाद, सड़क और नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और राशन वितरण जैसी समस्याएं लोगों की प्रमुख चिंता बनी हुई हैं।
शिकायतों के आंकड़ों पर शुरू हुई राजनीति
सीएम हेल्पलाइन पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि इतने कम समय में हजारों शिकायतों का दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि सरकार का सुशासन मॉडल प्रभावी है तो फिर इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं।
सरकार बोली- जनता का भरोसा बढ़ा
वहीं सरकार इस पूरे मामले को अलग नजरिए से देख रही है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव का कहना है कि भाजपा सरकार ने ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी को पूरा करने का काम किया है। सरकार पर जनता का भरोसा बढ़ा है और लोगों को विश्वास है कि उनकी समस्याएं सुनी और हल की जाएंगी। इसी भरोसे के कारण बड़ी संख्या में लोग सीएम हेल्पलाइन 1076 का उपयोग कर रहे हैं।
जनता को राहत मिलेगी या बढ़ेगी मुश्किल?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हेल्पलाइन पर दर्ज हो रही शिकायतों का समाधान कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से किया जाता है। क्योंकि यदि शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं हुआ तो लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। वहीं सरकार के लिए यह हेल्पलाइन सुशासन की असली परीक्षा भी साबित होगी।