कहते हैं कई बार सियासत में ऐसे संगोय बनते हैं जो चर्चा का विषय बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश की राजनीति में देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के मौके पर डॉ मोहन यादव मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है। विधायकों को लगातार फोन आ रहे हैं। संभावना है कि दो दर्जन से ज्यादा विधायक राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेंगे। दूसरी तरफ साल 2018 की वह तारीख भी याद आ रही है, जब आज ही के दिन कमलनाथ कैबिनेट के 28 मंत्रियों ने भी शपथ ली थी।
कमलनाथ सरकार में पहला मंत्रिमंडल विस्तार 25 दिसंबर को हुआ था
आपको जानकार हैरानी होगी कि 2018 में कमलनाथ सरकार बनने के बाद भी पहला मंत्रिमंडल विस्तार 25 दिसंबर को हुआ था। जबकि सीएम मोहन यादव का पहला मंत्रिमंडल विस्तार भी 25 दिसंबर को होने जा रहा है, इसके अलावा खास बात यह है कि तब भी 28 मंत्रियों ने शपथ ली थी। जबकि सीएम मोहन यादव के मंत्रिमंडल में भी 28 मंत्रियों के ही शपथ लेने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो दोनों सरकारों के बीच यह गजब का संयोग बन सकता है।
इतिहास को दोहराया जा रहा
मध्य प्रदेश में आज मंत्रिमंडल विस्तार के साथ इतिहास को दोहराया जा रहा है। साल 2018 में 25 दिसंबर को ही कमलनाथ सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था, जिसमें गोविंद सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह, राजवर्धन सिंह, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, तरुण भनोट, सचिन यादव, महेंद्र सिंह सिसोदिया, कमलेश्वर पटेल, हर्ष यादव प्रदीप जायसवाल, प्रियव्रत सिंह, बाला बच्चन, हुकुम सिंह कराड़ा सहित 28 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। अब एक बार फिर 25 दिसंबर को कैबिनेट का विस्तार हो रहा है। फर्क इतना है कि इस बार डॉक्टर मोहन यादव सरकार की कैबिनेट का विस्तार हो रहा है।
इन लोगों ने 2018 में कमलनाथ सरकार में भी मंत्रिपद की शपथ ली थी
खास बात यह भी है कि मोहन यादव की कैबिनेट में कुछ मंत्री ऐसे भी होंगे जिन्होंने 2018 में कमलनाथ सरकार में भी मंत्रिपद की शपथ ली थी। लेकिन बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस बार भी उन नामों में तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर ऐसे विधायक हैं 2018 में भी शपथ ली थी। जबकि इस बार भी अगर यह विधायक मंत्री पद की शपथ लेंते हैं तो यह भी एक अजब संयोग बनेगा। हालांकि कमलनाथ सरकार के समय हुए मंत्रिमंडल विस्तार की खासियत यह थी कि सभी 28 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी। जबकि सीएम मोहन यादव के मंत्रिमंडल में कैबिनेट के साथ-साथ राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्री भी शामिल होंगे।
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