रायपुर - पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी चल रही है और राज्य सरकार द्वारा इसे विधानसभा में पेश किया जा रहा है। बंगाल में पेश किए गए समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए RSS नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि, भारत एक देश, एक जन और एक तिरंगे वाला राष्ट्र है, इसलिए सभी नागरिकों की पहचान सबसे पहले भारतीय के रूप में होनी चाहिए।
'हम सब पहले भारतीय हैं'
RSS नेता इंद्रेश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए आगे कहा कि भारत के सभी लोग धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र चाहे कोई भी हो, भारतीय हैं। इसके साथ उन्होंने अपने इसबयान में आगे कहा कि दुनिया के अन्य देशों में भी मुसलमान अपनी राष्ट्रीय पहचान से जाने जाते हैं, जैसे अरब में अरबी, ईरान में ईरानी और तुर्किस्तान में तुर्की। उसी तरह भारत के मुसलमान भी सबसे पहले भारतीय हैं।
'मुसलमानों को भड़काने की राजनीति हो रही'
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल मुसलमानों को अलग से भड़काकर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। इंद्रेश कुमार के अनुसार, धीरे-धीरे मुस्लिम समाज भी यह समझ रहा है कि राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें देश से अलग दिखाने की कोशिश की जा रही है।
बंगाल की राजनीति का किया जिक्र
आरएसएस नेता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इसी तरह की राजनीति के कारण सत्ता परिवर्तन हुआ। उन्होंने दावा किया कि जो लोग समाज को बांटने की राजनीति कर रहे थे, वे अब सत्ता से बाहर होकर विपक्ष में बैठने को मजबूर हैं। इंद्रेश कुमार ने देशवासियों, खासकर मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसका स्वागत करना चाहिए। उनके अनुसार, UCC सभी नागरिकों के लिए समानता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बंगाल में लागू होगा UCC
पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी चल रही है और राज्य सरकार द्वारा इसे विधानसभा में पेश किया जा रहा है। राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में इसका वादा किया था और अब इसे कानून बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
यूसीसी (UCC) से संबंधित मुख्य बातें
समान कानून: इसके लागू होने पर सभी धर्मों और समुदायों के लिए शादी, तलाक, संपत्ति के बंटवारे, और उत्तराधिकार के नियम एक समान हो जाएंगे।
लक्ष्य: इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देना है। यह बहुविवाह (एक से अधिक शादियों) और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को समाप्त करने में मदद कर सकता है।
असम मॉडल: रिपोर्ट्स के अनुसार, बंगाल का यूसीसी विधेयक असम के कानून के मॉडल पर आधारित हो सकता है, जिसमें संविधान द्वारा संरक्षित आदिवासी समूहों को इसके दायरे से छूट देने का प्रावधान है।