उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक आरतियों का समय बदल दिया गया है। बुधवार से शुरू हुए इस परिवर्तन के साथ मंदिर में ठंडे जल से अभिषेक की पारंपरिक प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। धुलेंडी के अगले दिन से गर्मी का मौसम माना जाता है और इसी के साथ बाबा महाकाल की पूजा-पद्धति में भी मौसमी परिवर्तन लागू कर दिए जाते हैं।
ठंडे जल से अभिषेक और पंचामृत पूजन की शुरुआत
मंदिर में तड़के गर्भगृह के पट स्वस्ति वाचन के साथ खोले गए और वीरभद्र जी को प्रणाम कर पूजा की शुरुआत हुई। पुजारियों ने बाबा महाकाल का श्रृंगार उतारकर पंचामृत पूजन किया तथा कर्पूर आरती के बाद ठंडे जल से अभिषेक आरंभ किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बना पंचामृत अर्पित किया गया। फल, मिठाई और सूखे मेवों का भोग लगाकर बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, मुण्डमाल, रुद्राक्ष और सुगंधित फूलों की मालाओं से अलंकृत किया गया।
भस्म आरती के दिव्य दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु
महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई और पारंपरिक भस्म आरती सम्पन्न हुई। बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर में उपस्थित होकर इस अलौकिक आरती का दर्शन किया। भस्म आरती अपनी पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ही जारी रहेगी, जबकि अन्य आरतियों में समय परिवर्तन किया गया है।
धुलेंडी के बाद बदलता मौसम और पूजा-पद्धति में बदलाव
धुलेंडी के अगले दिन से गर्मी के मौसम की शुरुआत को देखते हुए हर वर्ष आरतियों का समय बदला जाता है। जैसे ही मौसम में तापमान बढ़ने लगता है, बाबा को ठंडक प्रदान करने के उद्देश्य से अभिषेक में जल और पूजन विधियों में परिवर्तन किया जाता है। हालांकि भस्म आरती, संध्या पूजन और शयन आरती अपने मूल समय पर ही होंगी।
अश्विन पूर्णिमा तक रहेगी नई समय-सारिणी
नए प्रबंध के अनुसार, अश्विन पूर्णिमा तक आरतियों का समय निम्नानुसार रहेगा। इन समयों का पालन मंदिर प्रशासन की ओर से अनिवार्य रूप से किया जाएगा ताकि भक्तों को सुविधा के साथ दर्शन उपलब्ध हो सकें।
नई समय-सारिणी: कौन-सी आरती कब होगी
भस्म आरती सुबह 4 से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी और यह समय नहीं बदला गया है। दद्योदक आरती का समय सुबह 7 से 7.45 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके बाद प्रातः 10 से 10.45 बजे तक भोग आरती सम्पन्न होगी। संध्या पूजन शाम 5 से 5.45 बजे तक होगा और संध्या आरती 7 बजे से 7.45 बजे तक संपन्न की जाएगी। रात्रि 10.30 से 11 बजे तक शयन आरती की जाएगी, जिसमें दिनभर की विधियों के बाद बाबा को विश्राम दिया जाता है।
बदले समय के साथ बढ़ी भक्तों की सहूलियत
महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों के समय में किया गया यह मौसमी परिवर्तन भक्तों की सुविधा और पूजा-पद्धति की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बढ़ते तापमान में ठंडे जल से अभिषेक और बदलते समय के साथ भक्त न केवल बेहतर व्यवस्था का अनुभव करेंगे, बल्कि पारंपरिक श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में अधिक सुगमता से शामिल हो सकेंगे।
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