देश में होली का पर्व सोमवार को सबसे पहले उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मनाया गया। परंपरा के अनुसार इस बार भगवान महाकाल को केवल एक किलो हर्बल गुलाल प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया गया। संध्या आरती के दौरान पुजारी ने भगवान को गुलाल अर्पित किया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर परिसर में गोबर के उपलों से बनी होलिका का दहन किया गया।
सुरक्षा कारणों से इस बार भी आम श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई। पहले हुई आग की घटना को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष सावधानी बरतते हुए यह निर्णय लिया। होलिका दहन में संभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
महाकाल मंदिर में धुलेंडी का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दौरान तड़के सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले भगवान महाकाल को गुलाल लगाया जाएगा, इसके बाद भगवान का भांग और चंदन से विशेष शृंगार किया जाएगा।
आरती के समय में बदलाव
महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय निर्धारित किया जाता है। इस बार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, 3 मार्च (होली के दूसरे दिन) से भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव होगा।
इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। ठंडे जल से स्नान का क्रम शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरती का समय भी बदला जाएगा।
Comments (0)