रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिल सकती है। इस बार का सत्र इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी है।
विपक्ष ने खोला मोर्चा, अविश्वास प्रस्ताव का ऐलान
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार को पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन वह विभिन्न मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने खाद-बीज संकट, बढ़े हुए बिजली बिल, कानून-व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
महंत का कहना है कि प्रदेश में जनता के बीच सरकार के प्रति बढ़ते आक्रोश को देखते हुए विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगा और सरकार की नाकामियों को सदन में उजागर करेगा।
खाद-बीज, बिजली और कानून व्यवस्था बनेंगे प्रमुख मुद्दे
हर साल की तरह इस बार भी मानसून सत्र में खरीफ फसल, खाद और बीज की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि इस बार बिजली दरों में बढ़ोतरी और कानून-व्यवस्था के मामलों को लेकर विपक्ष ज्यादा आक्रामक नजर आ सकता है।
विपक्ष का आरोप है कि किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, वहीं बिजली दरों में वृद्धि से आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इसके अलावा प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
ढाई साल बाद अविश्वास का हथियार
आमतौर पर किसी सरकार के कार्यकाल के अंतिम वर्षों में अविश्वास प्रस्ताव लाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार विपक्ष ने सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद ही यह कदम उठाने का निर्णय लिया है। राजनीतिक जानकार इसे सरकार पर दबाव बनाने और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
सरकार ने कहा- विपक्ष को अपनी ताकत का अंदाजा
विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा पर सत्तापक्ष ने भी पलटवार किया है। कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विपक्ष भले ही अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए, लेकिन उसे सदन में अपनी संख्या और स्थिति का पूरा अंदाजा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को मैदान में उतरने से पहले ही अपने स्कोर का पता है और सरकार पूरी मजबूती के साथ सदन में जवाब देने के लिए तैयार है।
सत्र में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
मानसून सत्र के दौरान सरकार जहां अपने ढाई साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाएगी, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा के बाद यह तय माना जा रहा है कि पांच दिनों तक सदन में राजनीतिक तापमान काफी ऊंचा रहेगा और सत्ता-विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिलेगी।