नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव टाकीज क्षेत्र में गौ सेवा के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक सामने आई है। यहां कई दिनों से एक बेसहारा बीमार गाय मरणासन्न हालत में तड़पती रही। आसपास के कुछ गौ सेवकों ने मानवता दिखाते हुए अपने स्तर पर उसकी सेवा की, लेकिन सरकारी तंत्र की अनदेखी के कारण उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका। गौ सेवकों ने बताया कि गाय की हालत बेहद गंभीर थी। उसे तड़पता देखकर वे किसी तरह उसे पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे, लेकिन वहां किसी भी चिकित्सक की मौजूदगी नहीं थी। इसके कारण गाय को समुचित उपचार नहीं मिल पाया।
डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय गौ सेवकों का आरोप है कि कई पशु चिकित्सक बिना ‘सुविधा शुल्क’ यानी पैसों के इलाज करने को तैयार नहीं होते। उनका कहना है कि अस्पताल के कई चक्कर लगाने के बाद भी डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचते और बीमार पशु तड़पते रहते हैं। गौ सेवकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि सरकारी वेतन पाने वाले डॉक्टरों के लिए अब बेजुबान पशुओं की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है। वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की लापरवाही का असर यह है कि निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी भी पशुओं के इलाज में कोताही बरत रहे हैं।
दवाइयां होते हुए भी बाहर से मंगवाई जाती हैं
गोटेगांव पशु चिकित्सालय को लेकर एक और गंभीर शिकायत सामने आई है। गौ सेवकों का कहना है कि अस्पताल में दवाइयों की उपलब्धता होने के बावजूद मरीजों से बाहर से दवाएं और अन्य चिकित्सा सामग्री मंगवाई जाती है, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी और खर्च उठाना पड़ता है।
गौ सेवकों में भारी रोष
बीमार गाय की हालत देखकर स्थानीय गौ सेवकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि पशु चिकित्सालय केवल कागजों में चल रहे हैं और जमीनी स्तर पर वे “सफेद हाथी” साबित हो रहे हैं। बिना पैसों के इलाज न करना डॉक्टरों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। गौ सेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी बेजुबान पशु को इस तरह तड़पकर मरने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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