बुंदेलखंड की धरोहर नगरी ओरछा में इस बार भी होली का उत्सव अपने परंपरागत वैभव और आधुनिक रंगों के संगम के साथ उमंग से मनाया गया। निवाड़ी जिले में स्थित यह ऐतिहासिक शहर हर वर्ष की तरह इस बार भी रंगों के महापर्व पर जीवंत हो उठा। प्राचीन मंदिरों और महलों की पृष्ठभूमि में उड़ते अबीर-गुलाल ने पूरे वातावरण को अनोखी रंगवाली आभा से भर दिया। ओरछा के भगवान रामराजा मंदिर के आसपास तो उत्साह का अलग ही नज़ारा दिखाई दिया, जहां श्रद्धालु और पर्यटक एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते रहे।
विदेशी पर्यटकों ने भी महसूस किया भारतीय रंगों का जादू
ओरछा की होली केवल देशवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशी मेहमानों के लिए भी किसी अद्भुत अनुभव से कम नहीं रही। इटली से आए सात सदस्यीय पर्यटकों के एक समूह ने स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों के साथ खूब रंग-गुलाल खेला। विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति में ऐसे रंगे कि हर तरफ उत्साह का अलग ही माहौल बन गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई देशों की यात्रा की है, लेकिन भारत में मनाई जाने वाली होली जैसा उत्सव कहीं और देखने को नहीं मिलता। यहां भेदभाव की जगह अपनापन है, और यही इस त्योहार की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र में उमड़ा उत्सव
ओरछा सदियों से अपने ऐतिहासिक वैभव, प्राचीन मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध रहा है। यही कारण है कि हर वर्ष होली, दीपावली और नए वर्ष पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। रंगों के इस महापर्व में जब प्राचीन छतरियां, राजमहल, चतुर्भुज मंदिर और रामराजा मंदिर की पृष्ठभूमि में गुलाल उड़ता है, तो दृश्य किसी जीवंत चित्र जैसा प्रतीत होता है। यहां धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम पर्यटकों को अपने आप आकर्षित कर लेता है।
उत्साह और सौहार्द से भरा रहा पूरा शहर
होली के दौरान ओरछा की गलियां मानो जीवंत हो उठीं। स्थानीय लोगों ने देश-विदेश से आए मेहमानों को अपनापन दिखाते हुए होली खेली, और इस मेल-जोल ने त्योहार के सौहार्दपूर्ण संदेश को और मजबूत किया। मंदिरों में गूंजती घंटियों और फूलों की वर्षा ने उत्सव को और भी पवित्र बना दिया। बुंदेलखंड की यह नगरी हर वर्ष जिस तरह रंगों में डूब जाती है, वह उसे देश के प्रमुख होली पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।
ओरछा की होली: विरासत, संस्कृति और उत्साह का अनूठा मेल
हर तरफ रंग, हर चेहरे पर मुस्कान और हर दिल में उत्साह—ओरछा की यही सबसे बड़ी पहचान है। यहां की होली न केवल परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि रंग केवल त्योहार नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने की एक खूबसूरत कड़ी भी हैं। इस वर्ष भी ओरछा ने यह संदेश एक बार फिर अपने पूरे वैभव के साथ दुनिया को दिया।
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