भारत की प्राचीन खगोलीय और कालगणना परंपरा को एक बार फिर विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में मध्य प्रदेश की धार्मिक और वैज्ञानिक नगरी उज्जैन एक ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक उज्जैन और में “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है,जिसमें देश-विदेश के दिग्गज वैज्ञानिक, विद्वान और शोधकर्ता भाग लेंगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम
यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु बनाने का प्रयास भी है। प्राचीन भारत में समय, खगोल और ब्रह्मांड की जो गहन समझ विकसित हुई थी, उसे आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उज्जैन, जो सदियों से खगोल और कालगणना का प्रमुख केंद्र रहा है, एक बार फिर इस वैश्विक विमर्श के केंद्र में होगा।
सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य उज्जैन के समीप स्थित डोंगला ग्राम को विश्व मध्यान यानी प्राइम मेरिडियन के रूप में स्थापित करने पर गंभीर और वैज्ञानिक चर्चा करना है। कर्क रेखा पर स्थित डोंगला को भारतीय खगोलशास्त्र में काल गणना का अत्यंत सटीक केंद्र माना जाता रहा है। आयोजन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डोंगला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलती है, तो यह भारत की वैज्ञानिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
देश-विदेश के वैज्ञानिकों और संस्थानों की भागीदारी
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित कई देशों से ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक, खगोलविद, शिक्षाविद और इतिहासकार शामिल होंगे। आयोजन मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। सम्मेलन में और जैसे प्रतिष्ठित संस्थान सह-आयोजक के रूप में जुड़े हैं, जिससे आयोजन की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता और वैज्ञानिक स्तर और सशक्त हुआ है।
प्री-कॉन्फ्रेंस आयोजनों से बना राष्ट्रीय माहौल
मुख्य सम्मेलन से पहले देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक समुदाय और युवाओं को इस विषय से जोड़ना है। दिल्ली, काशी, पुरी और बेंगलुरु जैसे शहरों में हुए इन आयोजनों के माध्यम से सम्मेलन के विषय और उसके महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली है।
उज्जैन में भव्य उद्घाटन, विज्ञान और संस्कृति का मेल
3 अप्रैल 2026 को उज्जैन के तारामंडल परिसर में सम्मेलन का भव्य उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में शिक्षा जगत के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। सम्मेलन के दौरान विज्ञान आधारित एक्सपो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और डोंगला वेधशाला का भ्रमण भी आयोजित किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को भारतीय खगोल परंपरा को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा।
मध्यप्रदेश और भारत के लिए क्यों अहम है यह आयोजन
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल उज्जैन और मध्य प्रदेश को वैश्विक पहचान देगा, बल्कि भारत को एक बार फिर समय और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन से वैज्ञानिक पर्यटन, सांस्कृतिक अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को नई दिशा मिलेगी। “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” सम्मेलन भारत की उस विरासत को पुनर्जीवित करने की पहल है, जिसने सदियों तक दुनिया को समय की सटीक गणना का मार्ग दिखाया।
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