मध्यप्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव ग्वालियर हाईकोर्ट ने शून्य (रद्द) घोषित कर दिया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निर्वाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी और तथ्यों को छुपाने के आधार पर ये फैसला सुनाया है।
आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने का आरोप
मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ यह याचिका भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया था कि उपचुनाव के दौरान मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी। मल्होत्रा के खिलाफ दर्ज छह आपराधिक मामलों में से उन्होने सिर्फ दो मामलों की जानकारी दी थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए चुनाव को निरस्त कर दिया।
दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को घोषित किया गया विजेता
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उपचुनाव में रामनिवास रावत दूसरे स्थान पर रहे थे। ऐसे में मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित करते हुए रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा सीट का निर्वाचित विधायक घोषित किया जाता है।
2024 के उपचुनाव में 7 हजार वोटों से हुई थी हार
23 नवंबर 2024 को आए उपचुनाव परिणाम में रामनिवास रावत को करीब 7 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद वे विजयपुर सीट से विधायक बन गए हैं।
कांग्रेस के दिग्गज नेता से बीजेपी मंत्री तक का सफर
रामनिवास रावत मध्य प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। वे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं। नवंबर 2024 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था और इसके बाद मंत्री पद की शपथ ली।
चंबल क्षेत्र में मजबूत पकड़, पांच बार रहे विधायक
चंबल क्षेत्र की राजनीति में रामनिवास रावत का खासा प्रभाव माना जाता है। वे विजयपुर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है। वर्तमान में वे भाजपा के नेता और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में सक्रिय हैं।
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