मध्यप्रदेश में बाघ और तेंदुओं की लगातार बढ़ती संख्या अब जंगलों की पारिस्थितिक वहन क्षमता (Carrying Capacity) के लिए चुनौती बनने लगी है। हालात यह हैं कि राज्य सरकार को इस स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कराने के लिए देहरादून स्थित (WII) से विशेषज्ञ सलाह लेनी पड़ी है। मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने WII को पत्र लिखकर टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बढ़ते शिकारी घनत्व और उससे उत्पन्न पारिस्थितिक समस्याओं के विस्तृत अध्ययन का अनुरोध किया है। इस पत्र की प्रति (NTCA) को भी भेजी गई है, ताकि प्रबंधन स्तर पर ठोस दिशा-निर्देश मिल सकें।
बाघों की संख्या 1000 तक पहुंचने का अनुमान
NTCA द्वारा जारी AITE-2022 रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ हैं, जिनमें से 785 अकेले मध्यप्रदेश में पाए जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि मौजूदा गणना में प्रदेश में बाघों की संख्या 1000 के करीब पहुंच सकती है।
वहीं तेंदुओं के मामले में भी मध्यप्रदेश देश में शीर्ष पर है। वर्ष 2022 में देशभर में 13,874 तेंदुए दर्ज किए गए थे, जिनमें से 3,907 मध्यप्रदेश में थे। वर्तमान में इनकी संख्या करीब 5000 मानी जा रही है।
आपसी संघर्ष से बढ़ी मौतें
वन अधिकारियों के मुताबिक जब किसी क्षेत्र में शिकारी प्रजातियों की संख्या जरूरत से ज्यादा हो जाती है तो शिकार, क्षेत्र और संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है। इसी कारण वर्ष 2025 में प्रदेश में 55 बाघ और 112 तेंदुओं की मौत दर्ज की गई, जो प्रोजेक्ट टाइगर के 53 वर्षों में सर्वाधिक है। अधिकांश मौतें आपसी संघर्ष और क्षेत्रीय टकराव से जुड़ी बताई जा रही हैं।
डब्ल्यूआईआई से मांगे गए तीन प्रमुख सुझाव
राज्य सरकार ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से तीन बिंदुओं पर मार्गदर्शन मांगा है—
- जंगलों में उपलब्ध शिकार, पानी और आवास के आधार पर वास्तविक वहन क्षमता का निर्धारण।
- शिकार-आधारित मॉडल से वहन क्षमता के प्रभाव का अध्ययन।
- ऐसे संकेतकों की पहचान, जिनसे यह पता चल सके कि जंगलों में और जानवरों को समाहित करने की गुंजाइश बची है या नहीं।
दुर्लभ दृश्य: मां की ममता
में एक दुर्लभ दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जहां चट्टानों के बीच एक मादा तेंदुआ अपने चित्तीदार शावक को जबड़ों में दबाए चलते हुए नजर आई। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर वरुण ठक्कर ने बताया कि 19 वर्षों के करियर में उन्होंने ऐसा दृश्य पहली बार देखा।
अमित शाह का संदेश
विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीना सिखाती है।
अमित शाह ने अपने संदेश में कहा—
“भव्य बाघ से लेकर सबसे छोटी प्रजाति तक, हर जीव पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वन्यजीवों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य है।” विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर यह मुद्दा एक बार फिर सामने आया है कि संरक्षण के साथ-साथ संतुलित प्रबंधन अब सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
Comments (0)