नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। रेलवे बोर्ड ने गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर प्रमोशन के लिए नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत निर्धारित योग्यता अंक हासिल नहीं कर पाने वाले SC/ST कर्मचारियों को भी कुछ शर्तों के साथ पदोन्नति का अवसर मिल सकेगा। नए नियमों में क्वालिफाइंग मार्क्स में 10 प्रतिशत की छूट के साथ ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति को शामिल किया गया है। रेलवे का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य आरक्षित पदों को लंबे समय तक खाली रहने से रोकना है। साथ ही, अलग-अलग जोन में प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को दूर करना भी इसका लक्ष्य है। हालांकि, ट्रेनों के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पदों पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
सभी जोन और उत्पादन इकाइयों को जारी हुए निर्देश
रेलवे बोर्ड ने नए प्रमोशन नियमों को लागू करने के लिए सभी जोनल महाप्रबंधकों और उत्पादन इकाइयों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर आरक्षित सीटों को भरने के लिए नई प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि पर्याप्त SC/ST कर्मचारी निर्धारित योग्यता अंक हासिल नहीं कर पाते हैं, तो असफल उम्मीदवारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर विचार किया जा सकेगा। इस व्यवस्था में उम्मीदवारों के प्रदर्शन और निर्धारित न्यूनतम मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। इसका सीधा उद्देश्य आरक्षित पदों को रिक्त रहने से रोकना है। रेलवे के अलग-अलग विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है। बोर्ड के निर्देशों के बाद अब सभी संबंधित जोन और उत्पादन इकाइयों को इसी व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
क्यों करना पड़ा प्रमोशन नियमों में बदलाव?
रेलवे बोर्ड के सामने SC/ST कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर अलग-अलग स्थानों पर नियमों की व्याख्या और प्रक्रिया में अंतर की स्थिति सामने आई थी। कई मामलों में आरक्षित पदों के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी निर्धारित योग्यता हासिल नहीं कर पाते थे। इसके कारण पदोन्नति के लिए निर्धारित आरक्षित पद खाली रह जाते थे। रेलवे बोर्ड ने पुराने दिशा-निर्देशों और समय-समय पर जारी किए गए विभिन्न परिपत्रों की समीक्षा की। समीक्षा के बाद पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने के लिए नई व्यवस्था जारी की गई है। बोर्ड का उद्देश्य सभी जोन और इकाइयों में नियमों को एक समान तरीके से लागू करना है। इससे कर्मचारियों को प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। साथ ही, आरक्षित पदों को भरने की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
क्वालिफाइंग मार्क्स में मिलेगी 10 प्रतिशत की छूट
नए दिशा-निर्देशों के तहत ग्रुप ‘सी’ के भीतर वरिष्ठता के आधार पर होने वाले चयन में SC/ST कर्मचारियों को निर्धारित अंकों में 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यह छूट प्रोफेशनल एबिलिटी और कुल एग्रीगेट अंकों से जुड़ी है। वहीं, ग्रुप ‘सी’ से ग्रुप ‘बी’ के 70 प्रतिशत चयन कोटे में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के लिए लिखित परीक्षा और कुल अंकों में 60 प्रतिशत कटऑफ निर्धारित है। SC/ST कर्मचारियों के लिए यह सीमा 50 प्रतिशत रखी गई है। हालांकि, सर्विस रिकॉर्ड में न्यूनतम 15 अंक हासिल करना अनिवार्य रहेगा। यानी छूट मिलने के बावजूद कर्मचारी को निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करना होगा। रेलवे की नई व्यवस्था का उद्देश्य आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के तहत अवसर उपलब्ध कराना है।
क्या है ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति?
‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मतलब है कि निर्धारित छूट देने के बाद भी यदि आरक्षित पद खाली रह जाते हैं, तो असफल SC/ST उम्मीदवारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को प्रमोशन का अवसर दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए भी कुछ न्यूनतम मानक तय किए गए हैं। उम्मीदवार को लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और सर्विस रिकॉर्ड में अलग-अलग न्यूनतम 20 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। इसके साथ ही इन सभी चरणों में कुल मिलाकर भी कम से कम 20 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। इस व्यवस्था में सभी असफल उम्मीदवारों को स्वतः प्रमोशन नहीं मिलेगा। बल्कि प्रदर्शन के आधार पर सबसे बेहतर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इससे आरक्षित पदों को भरने और योग्य कर्मचारियों को अवसर देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
छह महीने के लिए मिलेगा एड-हॉक प्रमोशन
‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति के तहत चयनित कर्मचारियों को शुरुआत में छह महीने के लिए एड-हॉक आधार पर पदोन्नति दी जाएगी। इसका मतलब है कि प्रमोशन तत्काल स्थायी नहीं होगा। छह महीने की अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारी के कामकाज और कार्यक्षमता का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारी के आचरण और पद से जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता की भी समीक्षा की जाएगी। छह महीने पूरे होने के बाद सक्षम प्राधिकारी कर्मचारी के प्रदर्शन की रिपोर्ट देखेंगे। यदि प्रदर्शन संतोषजनक पाया जाता है, तो पदोन्नति को नियमित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पदोन्नति पाने वाला कर्मचारी संबंधित पद की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा रहा है। यानी एड-हॉक प्रमोशन के बाद नियमित पदोन्नति प्रदर्शन की समीक्षा पर निर्भर करेगी।
सुरक्षा से जुड़े पदों पर नहीं मिलेगी कोई छूट
रेलवे ने साफ किया है कि नई व्यवस्था का लाभ सुरक्षा से जुड़े पदों पर नहीं दिया जाएगा। ट्रेनों के संचालन, यात्रियों की सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियों से जुड़े पदों को सेफ्टी कैटेगरी में रखा गया है। इन पदों पर प्रमोशन के लिए निर्धारित योग्यता और मानकों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। रेलवे के अनुसार, सुरक्षा से जुड़े काम में कर्मचारियों की दक्षता और निर्धारित मानकों का पालन बेहद जरूरी है। इसलिए ऐसे पदों पर किसी भी तरह की छूट देने का प्रावधान नहीं रखा गया है। संबंधित कर्मचारियों को इन पदों पर पदोन्नति के लिए तय मानकों को पूरा करना ही होगा। इस प्रावधान का उद्देश्य रेलवे संचालन की सुरक्षा व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता रोकना है। यानी नई छूट केवल पात्र गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर ही लागू होगी।
LDCE में लागू नहीं होगी ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ व्यवस्था
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ व्यवस्था सभी प्रकार की पदोन्नति प्रक्रियाओं में लागू नहीं होगी। ग्रुप ‘सी’ के तहत सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा यानी LDCE में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। LDCE में पैनल उम्मीदवारों की मेरिट के आधार पर तैयार किया जाता है। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रतियोगी प्रक्रिया और मेरिट सूची के अनुसार ही चयन किया जाएगा। इसके अलावा, जो चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, उसे नए नियमों के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नए दिशा-निर्देशों का असर भविष्य में होने वाली पात्र चयन प्रक्रियाओं पर होगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में नियमों की सीमा को स्पष्ट कर दिया है। इससे मौजूदा और आगामी चयन प्रक्रियाओं को लेकर विभागों में भ्रम की स्थिति कम होने की उम्मीद है।
बिना छूट परीक्षा पास करने वालों को UR सीट पर समायोजन
रेलवे बोर्ड ने SC/ST कर्मचारियों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी स्पष्ट किया है। यदि कोई SC/ST कर्मचारी बिना किसी छूट का लाभ लिए सामान्य योग्यता मानकों के आधार पर परीक्षा पास करता है, तो उसका समायोजन अनारक्षित यानी UR सीट पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि ऐसे कर्मचारी को आरक्षित कोटे की सीट में नहीं गिना जाएगा। इससे SC/ST श्रेणी के अन्य पात्र कर्मचारियों के लिए आरक्षित पद उपलब्ध रहेंगे। यह व्यवस्था आरक्षण के नियमों के अनुसार सीटों के उचित इस्तेमाल में मदद करेगी। रेलवे में चयन और पदोन्नति के दौरान आरक्षित तथा अनारक्षित सीटों के निर्धारण को लेकर यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे मेरिट के आधार पर सामान्य मानकों को पूरा करने वाले SC/ST कर्मचारियों को अलग से लाभ मिल सकेगा। साथ ही आरक्षित कोटे के पदों पर अन्य पात्र कर्मचारियों के लिए अवसर बना रहेगा।
क्या होगा नए नियमों का असर?
रेलवे बोर्ड के इस फैसले से SC/ST कर्मचारियों के लिए गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर प्रमोशन के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। खास तौर पर उन मामलों में जहां निर्धारित कटऑफ पूरा नहीं होने के कारण आरक्षित पद खाली रह जाते थे, नई व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति के जरिए बेहतर प्रदर्शन करने वाले असफल उम्मीदवारों को भी सीमित परिस्थितियों में अवसर मिल सकेगा। वहीं, छह महीने के एड-हॉक प्रमोशन के जरिए कर्मचारियों की कार्यक्षमता की समीक्षा भी की जाएगी। सुरक्षा श्रेणी के पदों को छूट से बाहर रखकर रेलवे ने संचालन और यात्री सुरक्षा के मानकों को प्राथमिकता दी है। नए नियमों से अलग-अलग रेलवे जोन में पदोन्नति प्रक्रिया को एकरूप बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, रेलवे बोर्ड ने आरक्षित पदों को भरने और पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।