तापसी पन्नू हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जो एक साल में सीमित फिल्मों का हिस्सा बनने के बावजूद अपने किरदारों के चयन को लेकर लगातार चर्चा में रहती हैं। उनकी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन चाहे जैसा रहा हो, अभिनय के स्तर पर उन्हें अक्सर दर्शकों और समीक्षकों की सराहना मिली है। खास तौर पर महिला केंद्रित और सामाजिक विषयों से जुड़ी फिल्मों में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए हैं, जिनमें अभिनय की अच्छी गुंजाइश रही है। यही वजह है कि अब वह अपनी आगामी फिल्म ‘गांधारी’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं, जिसमें एक मां के संघर्ष को कहानी का केंद्र बनाया गया है।
हालांकि तापसी का कहना है कि किसी अभिनेत्री की पहचान केवल कुछ खास तरह के किरदारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अपने हालिया इंटरव्यू में उन्होंने फिल्मों के चयन और उद्योग में मौजूद टाइपकास्टिंग की प्रवृत्ति पर खुलकर बात की। उनके मुताबिक जब कलाकारों को बार-बार एक ही तरह की भूमिकाएं दी जाती हैं तो दर्शकों के लिए भी कहानी और किरदारों का अगला कदम पहले से समझना आसान हो जाता है। वह इसी दायरे से बाहर निकलने के लिए लगातार अलग तरह की कहानियों और भूमिकाओं की तलाश करती हैं।
‘सब लोग अपने कंफर्ट जोन में जा रहे हैं’
तापसी ने बातचीत के दौरान कहा कि फिल्म उद्योग में कई लोग अपने कंफर्ट जोन में जाकर उन्हीं पुराने तरीकों को दोहराने लगे हैं। उनके अनुसार कुछ खास तरह के किरदारों के लिए उद्योग में अभिनेत्रियों का एक तय समूह दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इंटेंस और ग्लैमरस भूमिकाओं के लिए कुछ चुनिंदा अभिनेत्रियों को बार-बार कास्ट किया जाता है, जबकि सामाजिक और गंभीर विषयों वाली फिल्मों के लिए भी कुछ नाम लगातार दोहराए जाते हैं।
अभिनेत्री के मुताबिक ऐसी स्थिति कलाकारों के लिए सीमाएं पैदा कर देती है। यदि किसी अभिनेत्री को लगातार एक ही तरह के किरदार मिलते रहें तो धीरे-धीरे दर्शकों के मन में उसकी एक निश्चित छवि बन जाती है। तापसी इस छवि को तोड़ने के पक्ष में हैं और चाहती हैं कि उन्हें ऐसी भूमिकाएं भी मिलें, जिनमें उनके अभिनय के अलग-अलग रंग सामने आ सकें। उनके लिए फिल्म का चुनाव केवल कहानी या बड़े बैनर से जुड़ा फैसला नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उसमें कलाकार के रूप में कुछ नया करने की गुंजाइश कितनी है।
‘मुझे ऐसी फिल्मों में कास्ट मत करिए’
तापसी ने बताया कि टाइपकास्ट होने के डर से उन्होंने कई फिल्मों को मना किया है। उनका कहना था कि उन्होंने कुछ निर्माताओं से स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसी फिल्मों में कास्ट न किया जाए, जिनकी कहानी या अंत दर्शक पहले से आसानी से समझ सकते हैं। अभिनेत्री के अनुसार यदि किसी फिल्म की पूरी दिशा इतनी अनुमानित हो कि दर्शक उसकी समाप्ति का अंदाजा पहले ही लगा लें, तो उसमें उनके जुड़ने का औचित्य भी कम हो जाता है।
उनका यह नजरिया उनके करियर में किए गए कई अलग-अलग प्रयोगों से भी मेल खाता है। तापसी ने समय-समय पर ऐसी फिल्मों का चुनाव किया है, जिनमें पारंपरिक नायिका की भूमिका के बजाय कहानी को आगे बढ़ाने वाला केंद्रीय किरदार मिला। वह चाहती हैं कि किसी फिल्म में उनकी मौजूदगी केवल एक तय छवि को दोहराने के लिए न हो। उनके अनुसार यदि निर्माता किसी अभिनेत्री को केवल इसलिए चुनता है क्योंकि वह किसी विशेष तरह के किरदार के लिए पहले से जानी जाती है, तो यह कलाकार और फिल्म दोनों के लिए सीमित दृष्टिकोण हो सकता है।
महिला केंद्रित फिल्मों से अलग रास्ते की तलाश
तापसी के करियर में महिला प्रधान फिल्मों की संख्या काफी रही है और इन्हीं फिल्मों ने उन्हें एक मजबूत अभिनेत्री के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अब वह इसी पहचान के भीतर भी खुद को सीमित नहीं रखना चाहतीं। उनका मानना है कि महिला केंद्रित फिल्म करना अपने आप में किसी कलाकार की पूरी पहचान नहीं हो सकती। महत्वपूर्ण यह है कि कहानी, किरदार और उसकी जटिलता कलाकार को कुछ नया करने का अवसर दें।
‘गांधारी’ में मां के संघर्ष को केंद्र में रखा गया है और तापसी इस तरह की कहानी से एक बार फिर जुड़ रही हैं। हालांकि उनके हालिया बयान से स्पष्ट है कि वह भविष्य में केवल गंभीर, सामाजिक या भावनात्मक विषयों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। उनके लिए चुनौती यह है कि ऐसी पटकथाएं मिलें, जिनमें किरदार का स्वरूप पहले निभाई गई भूमिकाओं से अलग हो और जिसमें दर्शकों को भी उनका नया रूप देखने को मिले। यही सोच उन्हें अपने करियर के फैसलों में अधिक चयनात्मक बनाती है।
किरदारों की विविधता को मानती हैं सबसे जरूरी
तापसी का टाइपकास्टिंग से बचने का फैसला केवल व्यक्तिगत करियर रणनीति नहीं, बल्कि अभिनय को लेकर उनके दृष्टिकोण को भी सामने लाता है। एक कलाकार के लिए अलग-अलग भावनाओं, परिस्थितियों और व्यक्तित्व वाले किरदार निभाना उसकी रचनात्मक क्षमता को विस्तार देता है। यदि एक ही तरह की भूमिकाएं लगातार मिलती रहें तो अभिनय में चुनौती कम हो सकती है और दर्शकों की अपेक्षाएं भी एक निश्चित दायरे में बंध जाती हैं।
इसीलिए तापसी उन फिल्मों से दूरी बनाने को तैयार हैं, जिनमें उन्हें लगता है कि उनका किरदार पहले से बनी छवि को दोहराएगा। उनका संदेश निर्माताओं के लिए भी स्पष्ट है कि किसी कलाकार की पिछली सफलता को देखकर उसे उसी तरह की अगली भूमिका में कास्ट करना हमेशा सही विकल्प नहीं होता। तापसी चाहती हैं कि उनके पास ऐसी कहानियां आएं, जिनमें जोखिम हो, अनिश्चितता हो और अभिनय की नई संभावनाएं खुलती हों। आने वाले समय में उनकी फिल्मों का चयन यह तय करेगा कि वह इस सोच को किस तरह पर्दे पर और आगे ले जाती हैं।