नई दिल्ली - ट्रांसजेंडर क्रिकेटर के तौर पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से घरेलू महिला क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलने के बाद अनाया बांगर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस फैसले के बाद उन्हें समर्थन के साथ-साथ आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। दक्षिण अफ्रीका की क्रिकेटर मारिजाने कैप समेत कुछ पूर्व और मौजूदा क्रिकेटरों ने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की महिला क्रिकेट में भागीदारी को लेकर सवाल उठाए हैं। अब अनाया ने आलोचकों को जवाब देते हुए अपने संघर्ष और क्रिकेट में वापसी की कहानी साझा की है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली खेलने की मंजूरी
अनाया बांगर को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ट्रांसवुमेन के रूप में घरेलू क्रिकेट में खेलने की अनुमति दी है। उनके लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ट्रांसजेंडर बनने के बाद उन्हें दोबारा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने को लेकर काफी अनिश्चितता का सामना करना पड़ा था। अनाया का कहना है कि वह अब अपनी पहचान के साथ क्रिकेट खेलना चाहती हैं और उनके लिए यह अवसर किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। हालांकि, उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं होता। वह भविष्य में भारत की महिला क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने का सपना भी देखती हैं।

आलोचनाओं पर अनाया ने क्या कहा?
अनाया ने बताया कि बदलाव का उनका सफर आसान नहीं रहा। इस दौरान उन्हें भावनात्मक रूप से अकेलापन भी महसूस हुआ। उन्होंने आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की परिस्थिति को समझे बिना उसके बारे में फैसला सुनाना उचित नहीं है। अनाया के मुताबिक, उनके अनुभव को समझने के लिए लोगों को पहले इस विषय के बारे में खुद को शिक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस पूरे सफर में उनका एकांत भी उनके लिए ताकत बना और उन्होंने खुद के साथ रहकर कई चीजों को समझा।

परिवार ने दिया साथ
अनाया ने बताया कि ट्रांसजेंडर के रूप में अपनी पहचान सामने आने के बाद उन्हें लगा था कि शायद वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी। उस दौर में उन्हें काफी अकेलापन महसूस हुआ, लेकिन परिवार से मिले समर्थन ने उन्हें संभालने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने यह भी नहीं सोचा था कि उन्हें फिर से क्रिकेट खेलने का अवसर मिलेगा। वह केवल कोशिश कर रही थीं और यह देखना चाहती थीं कि आगे क्या रास्ता निकलता है।
BCCI की चुप्पी से निराश
अनाया ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI की भूमिका को लेकर भी निराशा जाहिर की। उनका कहना है कि जब उन्होंने भारत में क्रिकेट खेलने की संभावना को लेकर बोर्ड से संपर्क किया, तो उन्हें स्पष्ट जवाब मिलने के बजाय चुप्पी का सामना करना पड़ा। इसके उलट क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से उन्हें वह जवाब मिला जिसका वह इंतजार कर रही थीं। अनाया ने इसे भावनात्मक रूप से बेहद निराशाजनक अनुभव बताया।
टीम इंडिया खेलने का सपना बरकरार
अनाया अभी भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओर से खेलने की उम्मीद रखती हैं। उनका मानना है कि भविष्य में BCCI ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर अपनी नीति पर विचार कर सकता है और ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकता है, जिसके तहत योग्य खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में अवसर मिल सके। फिलहाल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली मंजूरी अनाया के लिए क्रिकेट में नई शुरुआत का रास्ता खोलती है। अब उनकी नजर मैदान पर वापसी और अपने प्रदर्शन के जरिए खुद को साबित करने पर है।