रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि यह किसी जरूरतमंद व्यक्ति की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है। हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) मनाया जाता है, ताकि लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा सके और नियमित रक्तदाताओं का सम्मान किया जा सके। भारत में हर दिन हजारों मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पाता, जिसके कारण कई लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। ऐसे में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी हो जाता है। रक्तदान को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं रहती हैं, जैसे क्या रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है, कितने दिनों के अंतराल पर ब्लड डोनेट किया जा सकता है और कौन व्यक्ति रक्तदान के लिए पात्र होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही अंतराल और स्वास्थ्य मानकों का पालन करते हुए किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता।
कितने दिनों के अंतराल पर कर सकते हैं रक्तदान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति हर 90 दिन यानी लगभग 3 महीने के अंतराल पर रक्तदान कर सकता है। यह समय इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि रक्तदान के बाद शरीर को नई लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) और आयरन की भरपाई करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रक्तदान रोजाना या हर महीने नहीं किया जा सकता। सुरक्षित रक्तदान के लिए निर्धारित समय सीमा का पालन करना जरूरी है, ताकि डोनर की सेहत पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
एक बार में कितना खून निकाला जाता है?
रक्तदान के दौरान आमतौर पर एक यूनिट रक्त लिया जाता है, जिसकी मात्रा लगभग 350 से 450 मिलीलीटर होती है। यह मात्रा एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर के कुल रक्त की तुलना में काफी कम होती है और शरीर कुछ ही दिनों में प्लाज्मा तथा कुछ हफ्तों में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण शुरू कर देता है। इसी वजह से नियमित और सुरक्षित अंतराल पर रक्तदान को स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है।
कौन कर सकता है रक्तदान?
रक्तदान के लिए कुछ जरूरी स्वास्थ्य मानक निर्धारित किए गए हैं। रक्तदाता की आयु 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका वजन कम से कम 45 से 50 किलोग्राम होना चाहिए। इसके अलावा रक्तदान से पहले हीमोग्लोबिन स्तर, ब्लड प्रेशर और सामान्य स्वास्थ्य की जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति रक्तदान के लिए पूरी तरह फिट है।
किन लोगों को रक्तदान नहीं करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों को एचआईवी, हेपेटाइटिस, गंभीर संक्रमण या कुछ विशेष संक्रामक बीमारियां हैं, उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अस्वस्थ महसूस करने वाले या हाल ही में गंभीर बीमारी से उबरे लोगों को भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही रक्तदान करना चाहिए। डायबिटीज या अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के मामले में रक्तदान की अनुमति उनकी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करती है।
रक्तदान से शरीर को क्या फायदे मिलते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अंतराल पर किया गया रक्तदान शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहता है और शरीर की कई जैविक प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। हालांकि रक्तदान का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे किसी जरूरतमंद मरीज को नया जीवन मिल सकता है। यही वजह है कि दुनियाभर में लाखों लोग स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं।
विश्व रक्तदाता दिवस का क्या है उद्देश्य?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सुरक्षित रक्तदान को बढ़ावा देना, लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करना और रक्तदाताओं के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करना है विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिक से अधिक लोग स्वैच्छिक रक्तदान करें तो देश में रक्त की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।