मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में आज एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। नासा (NASA) का ऐतिहासिक 'आर्टेमिस-2' मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाने के बाद मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लौट आए हैं। अमेरिकी समयानुसार शुक्रवार रात 8:07 बजे (भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह) उनकी 'ओरियन' (Orion) अंतरिक्ष यान ने कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' (समुद्र में उतरना) किया। मिशन के कमांडर रीड वाइजमैन ने सुरक्षित लैंडिंग के बाद खुशी जाहिर करते हुए कहा कि चारों अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने इस मिशन को 'एक असाधारण यात्रा' करार दिया। गौरतलब है कि इस मिशन में वाइजमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसन शामिल थे। क्रिस्टीना कोच ने चंद्रमा की कक्षा तक पहुँचने वाली पहली महिला बनकर इतिहास रचा है। इस सफलता पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई दी। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए एक गर्व का दिन बताया और कहा कि चंद्रमा के बाद अब उनका अगला लक्ष्य मंगल ग्रह होगा।
बनाया नया रिकॉर्ड
नासा के अनुसार, आर्टेमिस-2 मिशन ने दूरी के मामले में 70 के दशक के 'अपोलो-13' मिशन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जहाँ अपोलो-13 के यात्री पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर दूर गए थे, वहीं आर्टेमिस-2 के इन जांबाज यात्रियों ने 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तय कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। ओरियन कैप्सूल (जिसका नाम 'इंटीग्रिटी' रखा गया था) ने ध्वनि की गति से 33 गुना (मैक 33) की रफ्तार से वायुमंडल में प्रवेश किया।
अगला पड़ाव: चंद्रमा पर मानव कदम
1 अप्रैल को फ्लोरिडा से शुरू हुआ यह 10 दिवसीय मिशन चंद्रमा पर सीधे उतरने के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में मानव जीवन की क्षमताओं, नेविगेशन और संचार प्रणाली के परीक्षण के लिए था। अपनी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्र सतह पर कम से कम छह उज्ज्वल उल्कापिंडों की गिरावट के दुर्लभ दृश्य भी देखे। नासा की रिकवरी डायरेक्टर लिलियाना वियारियल ने बताया कि लैंडिंग के दो घंटे के भीतर यात्रियों को कैप्सूल से निकालकर अमेरिकी नौसेना के जहाज 'यूएसएस जॉन पी. मुर्था' के मेडिकल बे में ले जाया गया। यह मिशन 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मानव को उतारने के नासा के 'आर्टेमिस-3' मिशन की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण आधार साबित होगा।