बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई दो घटनाओं में 45 वर्षीय हिंदू स्वर्णकार अलीफ चंद्र दत्ता और 45 वर्षीय हिंदू महिला रानी सुशील की मौत हो गई। दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हत्याओं के पीछे धार्मिक कारण था या आपराधिक मकसद।
दुकान से घर लौटते वक्त स्वर्णकार पर हमला
पहली घटना नौगांव जिले के महादेबपुर उपजिला की है। रिपोर्टों के मुताबिक, अलीफ चंद्र दत्ता महादेबपुर बाजार में अपनी आभूषण की दुकान बंद करने के बाद सोमवार रात करीब 8:30 बजे घर के लिए निकले थे। रात करीब 9 बजे घर के पास कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन्हें रोककर धारदार हथियार से हमला कर दिया।
हमले में गंभीर रूप से घायल दत्ता को परिजनों और स्थानीय लोगों ने राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर उनके पास मौजूद करीब छह भरी सोना और 7 लाख बांग्लादेशी टका लेकर फरार हो गए।
महादेबपुर थाने के अधिकारी उमर फारुक के मुताबिक, पुलिस अभी यह तय नहीं कर पाई है कि मामला केवल लूटपाट से जुड़ा था या इसके पीछे कोई अन्य दुश्मनी अथवा मकसद भी था। मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है।
घर में घुसने की कोशिश के दौरान महिला पर हमला
दूसरी घटना कॉक्स बाजार जिले के महेशखाली उपजिला की बताई जा रही है। यहां 45 वर्षीय रानी सुशील पर उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहे एक अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर चाकू से हमला कर दिया।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार शाम करीब 7:30 बजे रानी घर में खाना बना रही थीं। इसी दौरान एक व्यक्ति ने घर में प्रवेश करने की कोशिश की। रानी ने शोर मचाया तो आरोपी ने कथित तौर पर उनका मुंह दबाया और चाकू से कई वार कर दिए। घायल अवस्था में उन्हें चकरिया उपजिला स्वास्थ्य परिसर ले जाया गया, जहां कुछ घंटे बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
महेशखाली थाने के अधिकारी अब्दुस सुल्तान ने बताया कि शुरुआती जांच में घटना चोरी की कोशिश से जुड़ी प्रतीत हो रही है। पुलिस आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर फिर चर्चा तेज
इन दोनों घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। हाल के दिनों में हिंदू समुदाय से जुड़े लोगों पर हमलों की खबरों के बीच इन हत्याओं ने चिंता और बढ़ाई है। हालांकि, दोनों मामलों में जांच पूरी होने से पहले इन्हें सीधे तौर पर सांप्रदायिक हिंसा करार देना उचित नहीं होगा, क्योंकि पुलिस ने अभी तक धार्मिक मकसद की पुष्टि नहीं की है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दुर्गापूजा से पहले बांग्लादेश सरकार ने हिंदू समुदाय की सुरक्षा और सभी धर्मों के लोगों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है। धार्मिक मामलों के मंत्री काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद ने हाल में हिंदू धार्मिक संस्थानों के समर्थन और सुरक्षा को लेकर सरकार की नीति पर जोर दिया था।