भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक के बाद इस दिशा में तेजी से कदम उठाए गए हैं। प्रारंभिक चरण में दोनों पक्षों के प्रमुख व्यापार वार्ताकारों ने नई दिल्ली में मुलाकात कर समझौते की रूपरेखा और कार्यप्रणाली को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।
वार्ता के प्रारंभिक दौर की बैठकें आयोजित
कनाडा के प्रमुख व्यापार वार्ताकार ब्रूस क्रिस्टी हाल ही में नई दिल्ली पहुंचे, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच प्रारंभिक वार्ता हुई। इस बैठक में समझौते से संबंधित शर्तों और दायरे को तय किया गया। अधिकारियों के अनुसार मार्च माह के दौरान कई प्रारंभिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं और आने वाले महीनों में वार्ता के अन्य दौर भी प्रस्तावित हैं।
द्विपक्षीय व्यापार को बड़े स्तर तक ले जाने का लक्ष्य
दोनों देशों के नेताओं द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुसार इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर अर्थात लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसके लिए वर्ष 2026 के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक आधार प्रदान कर सकती है।
व्यापारिक बाधाओं और मानकों पर विशेष ध्यान
वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है, जिनमें गैर-शुल्क बाधाएं, सीमा शुल्क व्यवस्था, स्वास्थ्य और पादप स्वच्छता मानक जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन विषयों पर स्पष्ट और संतुलित समझ विकसित करना समझौते की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार यह एक सतत प्रक्रिया है और दोनों पक्ष गंभीरता के साथ वार्ता को आगे बढ़ा रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में व्यापारिक विविधीकरण अत्यंत आवश्यक हो गया है। ऐसे समय में भारत जैसे तेजी से उभरते आर्थिक साझेदार के साथ व्यापक व्यापार समझौता कनाडा के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े एक नीति अध्ययन में भी यह उल्लेख किया गया है कि भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना कनाडा की दीर्घकालिक व्यापारिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
भविष्य में मजबूत आर्थिक संबंधों की संभावना
भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी खोल सकता है। यदि यह समझौता निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा हो जाता है तो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ सकता है और वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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