पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस संकट के बीच भारत एक प्रमुख मध्यस्थ और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले 24 घंटों में ईरान, यूएई (UAE) और कतर के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति पर गहन चर्चा की है।
ईरान के विदेश मंत्री का जयशंकर को फोन
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोमवार को एस. जयशंकर को फोन कर क्षेत्र के ताज़ा हालातों पर चर्चा की।
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द्विपक्षीय संबंध: दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात की।
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तनाव कम करने पर जोर: जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है। ईरानी दूतावास ने भी इस बातचीत की पुष्टि करते हुए इसे "क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास" के लिए महत्वपूर्ण बताया।
यूएई और कतर के साथ भी मंत्रणा
ईरान से पहले जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र के दो अन्य महत्वपूर्ण देशों के साथ भी संपर्क साधा:
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UAE: यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ चर्चा कर जयशंकर ने बिगड़ते हालातों का जायजा लिया।
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कतर: कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री तमीम बिन हमद अल थानी के साथ भी फोन पर लंबी बातचीत हुई। कतर इस क्षेत्र में शांति वार्ता के लिए एक अहम कड़ी माना जाता है।
तनाव की मुख्य वजह: अयातुल्ला खामेनेई की मौत और जवाबी कार्रवाई
पश्चिम एशिया में इस ताजा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी:
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हमला: अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।
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ईरान का पलटवार: जवाब में तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित इजरायली और अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया।
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वैश्विक प्रभाव: इस टकराव ने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों (Energy Markets) और समुद्री व्यापार मार्गों (Waterways) को बुरी तरह प्रभावित किया है।
जयशंकर का 'IIM रायपुर' में बड़ा बयान
शनिवार को रायपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री ने भारत की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक, ऊर्जा और संसाधनों का इस्तेमाल 'हथियार' (Weaponized) के रूप में किया जा रहा है।
"दुनिया एक अस्थिर और अप्रत्याशित माहौल का सामना कर रही है। ऐसे में भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए 'हेजिंग' (Hedging) और 'डी-रिस्किंग' (De-risking) पर ध्यान देना होगा। वैश्विक शक्ति संरचनाएं हमारी आंखों के सामने बदल रही हैं।" — एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
भारत का स्टैंड
भारत ने लगातार बातचीत, तनाव कम करने (De-escalation) और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। जयशंकर के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत ने अपनी घरेलू और बाहरी चुनौतियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।