ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे और उनके पूर्व ICT सलाहकार सजीब वाजेद जॉय के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बांग्लादेश में कथित आतंकी नेटवर्क को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वाजेद ने दावा किया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) से जुड़ा एक प्रमुख आरोपी मौलाना इकरामुल हक उर्फ अबू तल्हा जमानत पर रिहा होने के बाद बांग्लादेश में स्वतंत्र रूप से घूम रहा है। वाजेद के इस दावे के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े सुरक्षा पहलुओं को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि, इकरामुल हक के वर्तमान ठिकाने और उसके कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कौन है इकरामुल हक? सजीब वाजेद ने क्या दावा किया?
सजीब वाजेद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए पोस्ट में इकरामुल हक को कई उपनामों से पहचाने जाने का दावा किया है। उनके अनुसार, वह अबू तल्हा, मौलाना साबेद, नूर हुसैन, मंसूर और मिलन जैसे नामों का इस्तेमाल कर चुका है। वाजेद का दावा है कि इकरामुल हक भारत में दर्ज आतंकवाद से जुड़े कई मामलों में वांछित रहा है और उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिए भारतीय पासपोर्ट भी हासिल किया था। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित जांच एजेंसियों या अदालतों के आधिकारिक रिकॉर्ड को देखना जरूरी होगा।
2023 में गिरफ्तारी, बाद में जमानत का दावा
वाजेद के मुताबिक, इकरामुल हक को मई 2023 में ढाका के मदरटेक इलाके से उसकी पत्नी के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे काशिमपुर जेल भेजे जाने का दावा किया गया। सजीब वाजेद के अनुसार, 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया और इसके बाद उसकी गतिविधियों को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। वाजेद ने यह भी दावा किया कि इकरामुल हक के परिवार की ओर से उसके नारायणगंज के एक मदरसे में पढ़ाने की बात कही गई है, जबकि पुलिस उसकी तलाश जारी होने की बात कह रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
अल-कायदा नेटवर्क को लेकर वाजेद ने जताई चिंता
सजीब वाजेद ने अपने दावे को बांग्लादेश में अल-कायदा से जुड़े कथित स्थानीय नेटवर्क की गतिविधियों से भी जोड़ा है। उन्होंने अंसार अल-इस्लाम जैसे संगठनों के जरिए आतंकी नेटवर्क के विस्तार की आशंका जताई। उन्होंने पहले भी बांग्लादेश में कथित रूप से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और कट्टरपंथी संगठनों के प्रभाव को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताओं का मुद्दा उठाया था। वाजेद का कहना है कि यदि बांग्लादेश में चरमपंथी नेटवर्क को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा को लेकर चिंता
बांग्लादेश से लगती भारत की सीमा के कारण किसी भी संभावित आतंकी नेटवर्क की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील मुद्दा हैं। पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय सहित पूर्वोत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ और संदिग्ध गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि सजीब वाजेद के दावे के आधार पर भारतीय एजेंसियों ने किसी विशेष आतंकी खतरे के संबंध में नया अलर्ट जारी किया है, जब तक कि ऐसी आधिकारिक पुष्टि सामने न आए।
दावे और आधिकारिक पुष्टि के बीच अंतर जरूरी
इकरामुल हक की कथित रिहाई, उसके वर्तमान ठिकाने और AQIS में उसकी भूमिका को लेकर सामने आए दावे गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल इन्हें सजीब वाजेद के आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले में बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों, भारतीय जांच एजेंसियों या संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोई ताजा आधिकारिक पुष्टि सामने आने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।