काठमांडू: पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और हड़कंप के निशान अभी पूरी तरह मिटे भी नहीं थे कि अब तिब्बत से एक और बड़ी और डरावनी खबर सामने आ रही है। नेपाल सीमा के पास स्थित तिब्बत के कई इलाकों में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इस अचानक आई आपदा के बाद भारत-नेपाल सीमा से लेकर तिब्बत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों तक प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मच गई है।
तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप
तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज यानी GFZ के मुताबिक, भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। वहीं, भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार 27 अगस्त को तिब्बत क्षेत्र में 4.9 तीव्रता का भूकंपीय झटका भी दर्ज किया गया था। लगातार सामने आई इन भूकंपीय गतिविधियों ने पहले से आपदा प्रभावित हिमालयी क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही
इससे पहले 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर और पहाड़ी क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव के बाद अचानक भीषण बाढ़ आई थी। तेज बहाव के साथ पानी, बर्फ, चट्टान और भारी मात्रा में मलबा नीचे की ओर आया। इस प्राकृतिक आपदा ने सीमावर्ती क्षेत्रों में काफी नुकसान पहुंचाया। घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ, जबकि कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
ग्लेशियर टूटने से पैदा हुए थे भूकंपीय संकेत
ग्लेशियर आपदा के दौरान दर्ज हुए भूकंपीय संकेतों को शुरुआत में भूकंप से जोड़कर देखा गया था। हालांकि बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिला कि यह सामान्य भूकंप नहीं था। ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के अचानक ढहने से तेज भूकंपीय कंपन पैदा हुए थे, जिसके बाद भारी मात्रा में मलबा नीचे आया और विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बनी।
नेपाल में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित
इस आपदा से नेपाल में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की संख्या 1,200 के पार पहुंच चुकी है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। कई लोगों के सुरंगों और जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास फंसे होने की आशंका है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और मलबे के कारण बचाव दलों को लोगों तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
तिब्बत में भी बाढ़ का कहर
नेपाल के अलावा तिब्बत का सीमावर्ती इलाका भी इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुआ है। तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में आई बाढ़ से भी भारी नुकसान की जानकारी सामने आई है। यहां कई लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे समय में तिब्बत में आए नए भूकंप ने राहत एवं बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ा दी है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी
लगातार बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं और भूकंपीय गतिविधियों के बाद नेपाल अब चीन से लगती सीमा पर आपदा निगरानी और चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में भूकंपीय सेंसर, कैमरे और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में खतरे का जल्द पता लगाकर लोगों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना है।
अभी खत्म नहीं हुआ बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
हालिया आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत के कई पहाड़ी इलाकों में जमीन और ढलान अस्थिर बने हुए हैं। ऐसे में दोबारा भारी बारिश होने पर अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ यात्रियों को भी मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक चुनौतियां
ग्लेशियर का टूटना, अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी घटनाओं ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। लगातार बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच ग्लेशियर और पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में भविष्य में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान कम करने के लिए मजबूत अर्ली वार्निंग सिस्टम और बेहतर आपदा प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है।