इंदौर: शहर की सड़कों पर गड्ढों की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। बारिश शुरू होते ही कई प्रमुख सड़कों से लेकर कॉलोनियों की गलियों तक सड़कें बदहाल नजर आने लगी हैं। पिछली बारिश में गड्ढों को लेकर नगर निगम की काफी किरकिरी हुई थी। इसके बाद इस बार बारिश के दौरान ही नई तकनीक से गड्ढे भरने का काम शुरू किया गया, लेकिन कई जगह सड़कें फिर भी बदहाल बनी हुई हैं। गड्ढों की वजह से सोमवार को एक बाइक सवार की जान जाने की घटना ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर से गुजरने वाले हाईवे हों या अंदरूनी सड़कें, वाहन चालकों को जगह-जगह गड्ढों का सामना करना पड़ रहा है। इस बार इंदौर में बारिश अभी 20 इंच के आंकड़े तक भी नहीं पहुंची है, इसके बावजूद कई सड़कों से डामर उखड़ने लगा है।
AB रोड की सर्विस रोड पर हालात खराब
शहर के एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर और विजय नगर क्षेत्र में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण के चलते सर्विस रोड पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है और यहां जगह-जगह बड़े गड्ढे नजर आ रहे हैं। सत्यसाईं चौराहा और निरंजनपुर चौराहा के आसपास भी गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां कई बार दोपहिया वाहन चालक गड्ढों की वजह से गिर चुके हैं।
स्कीम नंबर 134 की सड़कें भी बदहाल
इंदौर बायपास पर एमआर-10 जंक्शन के ट्रैफिक को स्कीम नंबर 134 की ओर डायवर्ट किया गया है। इससे कॉलोनी की सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है। स्थानीय स्तर पर स्थिति यह है कि करीब आधा किलोमीटर सड़क का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। खास बात यह है कि कॉलोनी में अधिकांश सड़कें सीमेंट की बनी हुई हैं, इसके बावजूद भारी ट्रैफिक के कारण सड़कें टूट गई हैं। ट्रैफिक लगातार जारी रहने से मरम्मत कार्य में भी परेशानी आ रही है।
करोड़ों की सड़क पानी की लाइन की टेस्टिंग में टूटी
इंदौर में हाल ही में पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान एक नई सड़क टूटने का मामला भी सामने आया। इस सड़क के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष सोनाली मिमरोट ने सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्माण एजेंसियों को दिए जाने वाले ठेकों में गारंटी पीरियड के दौरान सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि कई सड़कें तीन साल तक भी टिक नहीं पा रही हैं।
नई तकनीक से गड्ढे भरने की कोशिश पर भी सवाल
पिछले साल की स्थिति से सबक लेते हुए नगर निगम अधिकारियों ने इस बार बारिश के दौरान ही नई तकनीक से सड़क के गड्ढे भरने का प्रयास शुरू किया है। हालांकि, कई इलाकों में लगातार बारिश और भारी ट्रैफिक के कारण मरम्मत के बाद भी सड़कें दोबारा खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। गड्ढों के कारण हो रहे हादसों को देखते हुए अब सड़क मरम्मत की गुणवत्ता के साथ-साथ निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी हो गया है। शहरवासियों की मांग है कि बारिश के दौरान खतरनाक गड्ढों की तत्काल पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से भरा जाए, ताकि किसी और हादसे की नौबत न आए।