भोपाल। मध्यप्रदेश में सत्ता वापसी की कोशिशों में जुटी कांग्रेस ने मिशन 2028 को लेकर अपने सबसे मजबूत और परंपरागत आदिवासी वोट बैंक पर फोकस बढ़ा दिया है। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) मुख्यालय में ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की हाई-प्रोफाइल बैठक हुई, जिसमें साफ संकेत मिला कि प्रदेश की सत्ता का रास्ता आदिवासी समाज से होकर ही गुजरता है।बैठक में सामने आए आंकड़ों और राजनीतिक विश्लेषण में यह बात उभरकर आई कि जब-जब आदिवासी वोट कांग्रेस से छिटका, पार्टी सत्ता से बाहर रही और जब 47 आरक्षित सीटों में से 30 के आसपास सीटें जीतीं, तब सरकार बनी।
सत्ता का समीकरण: 101 सीटों पर आदिवासी समाज निर्णायक
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 101 सीटों पर आदिवासी समाज का सीधा प्रभाव है।
47 आरक्षित सीटें: इनमें से फिलहाल 24 सीटें भाजपा, 22 कांग्रेस और 1 निर्दलीय के पास हैं। कांग्रेस इन्हीं सीटों पर बढ़त बनाकर सत्ता समीकरण बदलना चाहती है।
54 सामान्य सीटें: यहां आदिवासी मतदाता 16 से 39 प्रतिशत तक हैं, जो किसी भी चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं।
नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी राज्य है, जहां कुल जनसंख्या का करीब 23 प्रतिशत, यानी लगभग 1 करोड़ 95 लाख वोटर आदिवासी समाज से आते हैं।
नया ‘पड़ोसी सीट’ फॉर्मूला
बैठक में यह रणनीति तय की गई कि अब कांग्रेस का कोई भी बड़ा आदिवासी नेता सिर्फ अपनी विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। उसे अपनी सीट से लगी पड़ोसी सीटों पर भी लगातार सक्रिय रहना होगा, ताकि मिशन 2028 तक संगठन और जनाधार मजबूत किया जा सके।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का बड़ा आरोप
बैठक के बाद पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में आदिवासियों की 1 लाख 26 हजार हेक्टेयर जमीन निजी लोगों को बेची गई है। सिंगरौली, उमरिया, झाबुआ, रतलाम, धार, पन्ना और छतरपुर जैसे जिलों में आदिवासियों की जमीन का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण किया जा रहा है।
कांग्रेस का शंखनाद
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सिंगरौली में आदिवासियों की जमीन छीनकर कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के असली मालिक आदिवासी हैं और कांग्रेस इसके खिलाफ नए सिरे से आंदोलन का शंखनाद करेगी।
इन नेताओं को सौंपी गई रणनीतिक जिम्मेदारी
इस आंदोलन और रणनीति को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी कांग्रेस ने अपने तीन प्रमुख चेहरों को सौंपी है—
उमंग सिंघार (नेता प्रतिपक्ष)
कमलेश्वर पटेल (पूर्व मंत्री)
विक्रांत भूरिया (विधायक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस)
यह टीम जो रणनीति बनाएगी, पूरी पार्टी उसी के अनुसार आगे बढ़ेगी।
बैठक के अहम राजनीतिक संकेत
दिग्विजय–उमंग की केमिस्ट्री: बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की जुगलबंदी चर्चा का विषय रही।
एनसीआरबी के आंकड़ों पर हमला: जीतू पटवारी ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में आदिवासी महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले सबसे ज्यादा हैं।
बैठक में मौजूद रहे दिग्गज
बैठक में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, सुखदेव पांसे, पीसी शर्मा और आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कुल मिलाकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि मिशन 2028 में उसकी राजनीति की धुरी आदिवासी समाज रहेगा और इसी आधार पर सत्ता वापसी की जमीन तैयार की जा रही है।