मध्य प्रदेश में सड़क नेटवर्क को आधुनिक और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने राजधानी भोपाल के प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास समेत 7 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 489 किलोमीटर होगी और इन पर करीब ₹18,675 करोड़ खर्च किए जाएंगे। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने इन परियोजनाओं का प्रस्ताव राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति को भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, तेज परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
क्या है हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM)?
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) व्यवस्था है, जिसमें सड़क निर्माण की लागत सरकार और निजी कंपनी दोनों मिलकर वहन करते हैं। इस मॉडल के तहत परियोजना लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 60 प्रतिशत हिस्सा निजी डेवलपर निवेश करता है। बाद में सरकार निजी कंपनी को उसकी निवेश राशि किस्तों में ब्याज सहित लौटाती है।
टोल वसूली सरकार करेगी
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सड़क बनने के बाद टोल टैक्स वसूलने का अधिकार निजी कंपनी के पास नहीं होगा। टोल संग्रह पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहेगा। इससे राजस्व पर सरकार की सीधी पकड़ बनी रहेगी।
किन परियोजनाओं पर होगा काम?
प्रस्तावित परियोजनाओं में कटनी-दमोह फोर लेन, भोपाल ईस्टर्न बायपास छह लेन, सिवनी-बालाघाट फोर लेन, मंदसौर-सीतामऊ फोर लेन, मेलुआ चौराहा-मालथौन फोर लेन, तिलवारी-हरदी-जनकपुरी टू लेन और देवास-चापड़ा टू लेन सड़क शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के कई जिलों के बीच आवागमन आसान होगा और औद्योगिक तथा व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।