भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों के लिए फसल बीमा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को अगले साल से लागू करने की तैयारी चल रही है। योजना को जमीन पर लागू करने के लिए कृषि विभाग ने आवश्यक मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम परियोजना के टेंडर जारी कर दिए हैं।नई व्यवस्था लागू होने के बाद मौसम से प्रभावित होने वाली कई प्रमुख फसलों को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा। इनमें टमाटर, बैंगन, मिर्च, अदरक, केला, पपीता और अमरूद जैसी फसलें शामिल हैं।
टमाटर-मिर्च से लेकर केला-पपीता तक को मिलेगा बीमा कवर
मौसम आधारित फसल बीमा योजना में उन फसलों को सुरक्षा देने की व्यवस्था है, जिनकी पैदावार पर मौसम की परिस्थितियों का सीधा असर पड़ता है।प्रस्तावित योजना के तहत सब्जियों और बागवानी फसलों को भी बीमा सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। इससे प्राकृतिक आपदा या प्रतिकूल मौसम की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकेगी।अभी ऐसी फसलों का बीमा नहीं होने की स्थिति में प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर सरकार राजस्व परिपत्र पुस्तक के प्रावधानों के अनुसार राहत राशि देती है।
शिवराज सिंह चौहान ने भी उठाया था मुद्दा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले सप्ताह इस योजना को लेकर सवाल उठाते हुए किसान हित में इसे जल्द लागू करने की बात कही थी।प्रदेश की ओर से बताया गया था कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू करने के लिए मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम का होना जरूरी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।बताया गया कि पहली बार टेंडर जारी होने पर कंपनियों की ओर से अपेक्षित भागीदारी नहीं मिली थी। इसके बाद विभाग ने दोबारा टेंडर जारी किए हैं।
मौसम के आंकड़ों के आधार पर तय होगा नुकसान
मौसम आधारित फसल बीमा योजना सामान्य फसल नुकसान के आकलन से अलग तरीके से काम करती है। इसमें वास्तविक उपज के नुकसान के बजाय मौसम से जुड़े आंकड़ों को आधार बनाया जाता है।योजना में वर्षा, तापमान, हवा की गति और आर्द्रता जैसे मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग किया जाता है। इन निर्धारित मौसम परिस्थितियों के आधार पर बीमा दावे का आंकलन किया जाता है।वहीं, मौजूदा व्यवस्था में प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होने पर किसानों को राहत राशि देने का प्रावधान है और इसके लिए राजस्व परिपत्र पुस्तक के नियम लागू होते हैं।
किसानों को अलग से क्लेम के लिए आवेदन नहीं करना होगा
मौसम आधारित फसल बीमा योजना की एक खास बात यह है कि किसानों को बीमा दावा प्राप्त करने के लिए अलग से आवेदन या नुकसान की सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती है।
कृषि संचालक के अनुसार, योजना को लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि नई योजना के लिए मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम जरूरी है और इसके लिए टेंडर किए जा चुके हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना को लागू किया जाएगा।
सूखा-बाढ़ से लेकर ओलावृष्टि तक सुरक्षा
मौसम आधारित फसल बीमा योजना में किसानों की फसलों को कई तरह के प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा देने का प्रावधान है। इनमें सूखा, अल्पवृष्टि, अतिवृष्टि, बाढ़ और जलभराव जैसी स्थितियां शामिल हैं।इसके अलावा भूस्खलन, चक्रवात, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली और प्राकृतिक आग सहित विभिन्न प्राकृतिक जोखिमों की स्थिति में भी बीमा सुरक्षा का प्रावधान है।कटाई के बाद खेत में रखी उपज को भी निर्धारित अवधि तक बीमा संरक्षण दिए जाने की व्यवस्था है।
बीमित राशि का अधिकतम 5% तक प्रीमियम
योजना के तहत किसानों को बीमित राशि का अधिकतम पांच प्रतिशत अथवा वास्तविक प्रीमियम, जो भी कम हो, अंश के रूप में जमा करना होगा।अऋणी किसान को बीमा कराने के लिए फसल लगाने का स्वघोषित प्रमाण पत्र, नक्शा-खसरा, आधार कार्ड और IFSC कोड समेत आवश्यक दस्तावेज देने होंगे। इसके साथ संबंधित बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति भी जमा करनी होगी।
किसानों को प्राकृतिक आपदा से नुकसान में मिलेगी राहत
मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों के लिए फसल सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। सूखा, अत्यधिक बारिश, बाढ़, ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों से फसलों को नुकसान होने पर किसानों की आय सीधे प्रभावित होती है।ऐसे में मौसम आधारित बीमा योजना का उद्देश्य मौसम से जुड़े जोखिमों के खिलाफ किसानों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। अब मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम की टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना को लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।