राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए दावा किया कि देश की शिक्षा प्रणाली पीछे जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले आईआईटी और स्कूल जैसी संस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया गया, लेकिन अब उनके अनुसार व्यवस्था को ‘रिवाइंड’ किया जा रहा है।
1. उन्होंने अपने भाषण में आंकड़े दिखाने की बात कही और दावा किया कि 2014 से पहले शिक्षा पर बजट का 4.6 प्रतिशत खर्च होता था, जो अब 2.6 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षा के लिए जाने वाले 7.7 लाख करोड़ रुपये का लाभ अरबपतियों को मिला।
2. ‘सिस्टम को स्टूडेंट से खतरा, क्योंकि वह सवाल पूछता है’
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी ताकत उनकी जिज्ञासा और सवाल पूछने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि छात्र व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछता है और यही वजह है कि उनके अनुसार सिस्टम छात्रों की आवाज से असहज होता है।उन्होंने अपने भाषण में अमित शाह के बेटे के क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन बनने, कारोबार के कथित केंद्रीकरण, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका से जुड़े सवालों का उल्लेख किया।राहुल गांधी ने इस संदर्भ में ‘सिस्टम स्टूडेंट नहीं चाहता, सिस्टम अंधभक्त चाहता है’ जैसी टिप्पणी भी की। यह उनका राजनीतिक बयान था।
3. ‘स्टूडेंट मोहब्बत की बात करता है, अंधभक्त नफरत फैलाता है’
राहुल गांधी ने छात्रों और ‘अंधभक्त’ शब्द के जरिए दो अलग-अलग व्यवहारों की तुलना की। उन्होंने कहा कि छात्र प्रेम, सम्मान, विनम्रता और दूसरी विचारधाराओं को समझने की कोशिश करता है।उन्होंने दावा किया कि इसके विपरीत ‘अंधभक्त’ नफरत, अहंकार और डर की मानसिकता से जुड़ा होता है।
4. ‘सिस्टम पर भरोसा खत्म हो गया’
परीक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों से भी गलतियां हुई हैं, लेकिन छात्रों का सिस्टम पर भरोसा कमजोर हुआ है। कार्यक्रम में छात्रों की ओर से ‘सर, हम सिस्टम से हार गए’ जैसी प्रतिक्रिया सामने आने की बात भी रिपोर्ट हुई है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सिस्टम में मौजूद कुछ लोग पैसे के लिए पेपर लीक करते हैं और इससे लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार रहेगा तो उसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ेगा।
5. ‘शिक्षा लग्जरी नहीं, हर स्टूडेंट का हक’
राहुल गांधी ने शिक्षा को छात्रों का अधिकार बताते हुए कहा कि शिक्षा कोई लग्जरी नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र देश की नींव हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को शुरुआती शिक्षा से लेकर स्कूल, कॉलेज और रोजगार तक अवसर उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था तैयार करे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है, क्योंकि छात्रों की शिक्षा और रोजगार के अवसर देश के भविष्य से जुड़े हैं।
‘छात्रों की गूंज’ में शिक्षा और रोजगार पर फोकस
इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का फोकस छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर रहा। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।राहुल गांधी की छात्र संवाद की यह पहल इससे पहले भी अलग-अलग शहरों में आयोजित हो चुकी है और इसमें शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।