नई दिल्ली. केंद्र सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के डेटाबेस को ठीक करने के लिए पिछले छह महीनों से राशन नहीं लेने वाले 1.58 करोड़ लाभार्थियों के राशन कार्ड अक्टूबर से अस्थायी रूप से बंद करने जा रही है। ये साइलेंट राशन कार्ड कहलाते हैं जिनसे लंबे समय से अनाज नहीं उठाया गया। सरकार का लक्ष्य डुप्लिकेट मर चुके दूसरी जगह चले गए या अयोग्य लोगों के नाम हटाकर असली लाभार्थियों तक अनाज पहुंचाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नाम तुरंत नहीं हटाए जाएंगे बल्कि कार्ड कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएंगे। लाभार्थियों को अपनी पात्रता साबित करने का मौका मिलेगा।
तीन महीने में पूरी करनी होगी ई-केवाईसी
संशोधित टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कंट्रोल ऑर्डर में ऐसे राशन कार्डों को कुछ समय के लिए निष्क्रिय करने का प्रावधान है। अंतिम निर्णय लेने से पहले तीन महीने के भीतर फील्ड वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अगर इस अवधि में ई-केवाईसी और सत्यापन पूरा हो जाता है तो कार्ड फिर से चालू कर दिए जाएंगे। अन्यथा नाम डेटाबेस से हटाए जा सकते हैं। सरकार तीन महीने में साइलेंट राशन कार्ड से जुड़ी समस्याएं हल करना चाहती है। लाभार्थियों को जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।
साइलेंट राशन कार्ड क्या हैं
साइलेंट राशन कार्ड वे कार्ड हैं जिनसे पिछले छह महीनों में अनाज नहीं लिया गया। ऐसे कार्डों की बड़ी संख्या पीडीएस सिस्टम में मौजूद है जिससे अनाज की बर्बादी और गलत लोगों तक पहुंचने की आशंका रहती है। सरकार इन कार्डों को चिन्हित कर अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर रही है। इससे असली जरूरतमंदों तक राशन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। कई मामलों में लोग दूसरी जगह चले गए होते हैं या परिवार में बदलाव हो चुका होता है फिर भी कार्ड सक्रिय रहते हैं। इस प्रक्रिया से सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने का प्रयास है।
डेटाबेस सुधार का उद्देश्य
सरकार का तर्क है कि अनाज असली लाभार्थियों तक पहुंचाने और डुप्लीकेट मर चुके दूसरी जगह चले गए या अयोग्य लोगों की वजह से होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए डेटाबेस को ठीक करना जरूरी है। पीडीएस सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने और लीकेज रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। डिजिटल सत्यापन और ई-केवाईसी के जरिए पात्रता की जांच की जाएगी। इससे सरकारी अनाज का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और पात्र परिवारों को नियमित राशन मिलता रहेगा। सुधार की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं करोड़ों नाम
सरकार पहले भी पीडीएस डेटाबेस को ठीक करने के लिए डिजिटाइजेशन आधार सीडिंग और ई-केवाईसी का इस्तेमाल कर चुकी है। खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2024 में बताया था कि इन प्रक्रियाओं के जरिए पीडीएस सिस्टम से करीब 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटा दिए गए थे। मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को डी-डुप्लीकेशन बताया जिसका मकसद सिर्फ पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाना था। पिछले अनुभवों के आधार पर अब साइलेंट कार्डों पर कार्रवाई तेज की जा रही है। इससे सिस्टम और मजबूत होने की उम्मीद है।
लाभार्थियों के लिए जरूरी कदम
जिन लोगों ने लंबे समय से राशन नहीं लिया है उन्हें तुरंत ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी है। नजदीकी राशन दुकान या कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से सत्यापन कराया जा सकता है। तीन महीने का समय दिया गया है इसलिए देरी न करें। अगर कार्ड अस्थायी रूप से बंद होता है तो भी सत्यापन पूरा होने पर उसे फिर से सक्रिय किया जा सकता है। सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से लाभ जारी रह सकता है। सरकार की अपील है कि पात्र लाभार्थी जल्द प्रक्रिया पूरी करें।