प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने बुधवार (26 अप्रैल) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सौराष्ट्र तमिल संगमम के समापन समारोह को संबोधित किया। साथ ही उन्होंने श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित 'सौराष्ट्र-तमिल संगमप्रशस्ति' पुस्तक का विमोचन किया। इस 10 दिवसीय संगमम में 3000 से अधिक लोग एक विशेष ट्रेन सौराष्ट्रियन तमिल से सोमनाथ आए थे। यह कार्यक्रम 17 अप्रैल को शुरू हुआ था, जिसका समापन 26 अप्रैल को सोमनाथ में हुआ।
'भारत विविधता को विशिष्टता के रूप में जीने वाला देश है'
पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो विविधता का जश्न मनाता है; हम विभिन्न भाषाओं, विभिन्न कलाओं, विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और रीति-रिवाजों का जश्न मनाते हैं। हमारा देश उनकी आस्था से लेकर आध्यात्मिकता तक विविधता को समाहित करता है और उसका जश्न मनाता है! हमारी ये विविधता हमें बांटती नहीं है बल्कि हमारे बंधन को मजबूत बनाती है। ऐसी है हमारे देश की खूबसूरती। भारत विविधता को विशिष्टता के रूप में जीने वाला देश है। हम जानते हैं कि अलग-अलग धाराएं जब साथ आती हैं तो संगम का सृजन होता है। हम इन परंपराओं को सदियों से पोषित करते आए हैं।
2047 के भारत का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि आज हमारे पास 2047 के भारत का लक्ष्य है। हमें देश को आगे लेकर जाना है, लेकिन रास्ते में तोड़ने वाली ताकतें और भटकाने वाले लोग भी मिलेंगे। भारत कठिन से कठिन हालातों में भी कुछ नया करने की ताकत रखता है। सौराष्ट्र और तमिलनाडु का साझा इतिहास हमें यह भरोसा देता है।
'भारत को सांस्कृतिक टकराव पर नहीं तालमेल पर बल देना है'
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को सांस्कृतिक टकराव पर नहीं, बल्कि तालमेल पर बल देना है। संघर्षों को नहीं संगमों और समागमों को आगे बढ़ाना है। हमें भेद नहीं खोजने, बल्कि भावनात्मक रिश्ते बनाने हैं। यही भारत की वो अमर परंपरा है जो सबको साथ लेकर समावेश के साथ आगे बढ़ती है, सबको स्वीकार कर आगे बढ़ती है।
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