हर साल 11 अप्रैल को हम भारत के अग्रणी समाज सुधारकों, शिक्षकों और विचारकों में से एक, महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती मनाते हैं (Jyotiba Phule)। महात्मा ज्योतिबा फुले एक समाज सुधारक, जाति-विरोधी कार्यकर्ता, विचारक और लेखक थे। इस साल ज्योतिराव गोविंदराव फुले की 196वीं जयंती है।
Jyotiba Phule का जीवन परिचय
ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था। उनका परिवार फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करता था। चूंकि परिवार फूलों का काम करता था लिहाजा ज्योतिबा को ‘फुले’ के नाम से जाना जाने लगा था। ज्योतिबा की बचपन से ही पढ़ाई में काफी रुचि थी। लेकिन जब उन्होंने स्कूल जाना शुरु किया तब उनके रिश्तेदारों ने ज्योतिबा के पिता से यह कहना शुरु कर दिया कि पढ़ लिख कर बेटा किसी काम का नहीं रह जाएगा इसलिए ज्योतिबा को बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लेकिन पढ़ने में रुचि के कारण ज्योतिबा ने परिवार से जिद कर दोबारा पढ़ाई शुरु कर दी। यही कारण है कि उन्होंने अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढ़ाई 21 साल की उम्र में पूरी की।
स्त्री शिक्षा को दिया बढ़ावा
ज्योतिबा ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर 1848 में स्त्री शिक्षा के लिए एक क्रांतकारी कदम उठाया था। उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए एक स्कूल की स्थापना की थी, जो भारत में महिला शिक्षा के लिए बना पहला स्कूल था। इतना ही नहीं तमाम विरोध के बाद भी उन्होंने अपनी पत्नी सावित्री को स्कूल में पढ़ने के लिए इतना ही नहीं तमाम विरोध के बाद भी उन्होंने अपनी पत्नी सावित्री को स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा था।
पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ज्योतिबा फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके विचार लाखों लोगों को शक्ति देते हैं। उन्होंने ट्वीट में कहा कि, “महात्मा फुले की जयंती पर, मैं उन्हें नमन करता हूं। सामाजिक न्याय और दलितों को सशक्त बनाने में उनके महान योगदान को याद करता हूं। उनके विचार लाखों लोगों को आशा और शक्ति देते हैं।”
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