Same Gender Marriage: मंगलवार (25 अप्रैल) को समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिका पर सुनवाई के चौथे दिन सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस विषय पर कई टिप्पणियां पेश की। इस बीच याचिकाकर्ता की वकील गीता लूथरा के कहा 'शादी एक जादुई शब्द है'। उन्होंने अपने व्याख्यान के अंत में बेंच से कहा, शादी एक जादुई शब्द है, और इस जादू का प्रभाव पूरी दुनिया में है।उन्होंने कहा कि इसका हमारे सम्मान और जीवन जीने से जुड़े मामलों से सीधा संबंध है।
'जैसे महिलाओं से छीन लिया जाए मतदान का अधिकार'
याचिकाकर्ता की तरफ से अपना पक्ष रखते हुए उनकी वकील गीता लूथरा ने कहा, समलैंगिक विवाह (Same Gender Marriage) करने वालों को शादी करने से वंचित करना ठीक वैसा ही है जैसे महिलाओं से उनके मतदान का अधिकार छीन लिया जाए। उन्होंने कहा, यह ऐसा ही है जैसा पहले कभी लिंग के आधार पर महिलाओं को वोट देने के अधिकारों को छीन लिया जाता था।
वर्चुअल तरीके से शामिल हुए न्यायमूर्ति
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमारे पास आज सुनवाई के लिए हाइब्रिड संविधान पीठ होगी क्योंकि न्यायमूर्ति कौल बीमारी से उबर रहे हैं। न्यायमूर्ति भट शुक्रवार को कोविड-19 से संक्रमित पाए गए। इसलिए वे वर्चुअल तरीके से शामिल हुए हैं। उन्होंने न्यायमूर्ति कौल से यह भी कहा कि अगर वह चाहें तो पीठ बीच में संक्षिप्त विराम ले लेगी ताकि वह दिन भर चलने वाली सुनवाई के दौरान कुछ राहत महसूस कर लें।
सहमति से बने समलैंगिक संबंध अपराध श्रेणी से बाहर
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 20 अप्रैल को सुनवाई में कहा था कि सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के बाद वह अगले कदम के रूप में 'शादी की विकसित होती धारणा' को फिर से परिभाषित कर सकता है। पीठ इस दलील से सहमत नहीं थी कि विषम लैंगिकों के विपरीत समलैंगिक जोड़े अपने बच्चों की उचित देखभाल नहीं कर सकते।
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