सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पहलवानों के धरने पर आगे की सुनवाई करने से इनकार कर दिया है (Wrestlers Protest )। देश के शीर्ष पहलवानों ने कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ वे तीन महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न याचिका को बंद करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन इसके बावजूद उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। मीडिया से बात करते हुए, पहलवानों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय उनके लिए कोई झटका नहीं है और उनके मन में न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
अदालत से झटका (Wrestlers Protest)
उच्चतम अदालत ने कहा कि पहलवानों की ओर से एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। अब इस मामले में पुलिस दो एफआईआर दर्ज कर चुकी है, ऐसे में आगे की सुनवाई बंद की जाती है। चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका का उद्देश्य FIR को लेकर था जो दर्ज हो चुकी है। मामला अब मजिस्ट्रेट के सामने है और कोई मसला हो तो हाई कोर्ट जाने की छूट है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि, "आप प्राथमिकी दर्ज करने और शिकायतकर्ताओं के लिए सुरक्षा के लिए विशिष्ट प्रार्थनाओं के साथ यहां आए थे। अब आपकी दोनों प्रार्थनाओं पर ध्यान दिया गया है। यदि आपको कोई और शिकायत है, तो आप उच्च न्यायालय या न्यायिक मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकते हैं।"
सुनवाई के दौरान भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महिला पहलवानों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
पहलवानों ने कहा आगे के विकल्प खुले है
पहलवानों ने आगे कहा कि उनके पास "सभी विकल्प खुले हैं" और वे वरिष्ठों से परामर्श करने के बाद भविष्य की रणनीति तय करेंगे। पहलवानों ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं लेकिन डब्ल्यूएफआई प्रमुख के खिलाफ हमारा विरोध जारी रहेगा।"
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