देश में लगातार बेरोजगारी बढ़ती जा रही है (Unemployment in India)। बेरोजगारी को लेकर अब यह स्थिति बन गई है कि गांव से भी युवाओं का पलायन होने लगा है। बात करें हम बेरोजगारी पर सरकारी तंत्र के लगाम कसने की तो अब तक सभी दलों की सरकारें इसमें विफल साबित रही हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) भारत की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली संस्था है। उसके अनुसार दिसंबर 2021 में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.9 फीसदी हो गई थी। नवंबर में यह 7 फीसदी थी कि एक साल पहले दिसंबर 2020 में बेरोजगारी दर 9.1 फीसदी से ज्यादा थी। हाल के दिनों में अनुभव किए गए स्तरों की तुलना में भारत में बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है। 2018-19 में बेरोजगारी दर 6.3 फीसदी और 2017-18 में 4.7 फीसदी थी।
हाल ही में निकली रेलवे भर्ती में कुल पदों की संख्या 1 लाख 40 हजार थी, लेकिन उसके लिए ढ़ाई करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। देश में बढ़ती बेरोजगारी का यह एक और ताजा उदाहरण है।
फैक्ट फाइल (Unemployment in India)
2018-2020 में 25 हजार लोगों ने की आत्महत्या
2021 में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.9 फीसदी हो गई
2020 में बेरोजगारी दर 9.1 फीसदी से ज्यादा थी।
2018-19 में बेरोजगारी दर 6.3 फीसदी
2017-18 में 4.7 फीसदी थी
9,140 लोगों ने बेरोजगारी के कारण जान गंवाई
16,091 लोगों ने कर्ज के बोझ के चलते अपनी जान गवाई
ये भी पढ़े: बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक, चुनाव और संगठन के कार्यों को लेकर बनेगी रणनीति
कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी
बेरोजगारी की परिभाषा समझना चाहें तो जब देश में कार्य करने वाली जनशक्ति अधिक होती है और काम करने पर राजी भी होती है। परंतु उन्हें प्रचलित मजदूरी दर पर कार्य नहीं मिल पाता है। तो इसी अवस्था को बेरोजगारी कहते हैं। आंकड़ों से साफ है कि कोरोना काल में बेरोजगारी बढ़ी है। यह हाल तब हुए जब केंद्र सरकार ने कोविड-19 के कारण बने आर्थिक हालात को संभालने और आम लोगों की मदद के लिए मई 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी।
Written By: Dilip Pal
Comments (0)