Gujarat Riots: साल 2002 में गुजरात के नरोदा गाम नरसंहार केस में गुरुवार को अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी, बाबू बजरंगी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस केस में कुल 86 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिसमें से 18 आरोपियों को मौत हो चुकी है। ऐसे में कोर्ट ने आज नरोदा दंगा मामले के जीवित बचे 68 आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
आज से 21 साल पहले 28 फरवरी 2002 को हुए इस हिंसा में 11 लोगों की जान चली गई थी। अयोध्या से लौट रही साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में पेट्रोल डालकर गुजरात के गोधरा में कई लोगों को जिंदा जला दिया गया था।
2002 Gujarat riots | All accused acquitted in Naroda Gam massacre case pic.twitter.com/vwk4qryz29
— ANI (@ANI) April 20, 2023
सभी आरोपियों को किया बरी (Gujarat Riots)
अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने 16 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान फैसले की तारीख 20 अप्रैल तय की थी। साथ ही सभी आरोपियों को उस दिन कोर्ट में पेश होने के आदेश भी दिए गए थे। आज कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया। इस मामले में सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
माया कोडनानी को बनाया गया था दंगों का मुख्य आरोपी
27 फरवरी को हुए गोधरा ट्रेन कांड के अगले दिन यानि 28 फरवरी को सुबह से नरोदा गाम में हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में भीड़ के हाथों 11 लोगों की जान चली गई। घटना के बाद गुजरात की तत्कालीन बीजेपी सरकार और उनके मंत्रियों पर सवाल उठने लगे। माया कोडनानी का नाम तब सबसे अधिक चर्चा में आया था। एसआईटी ने अपनी जांच में माया कोडनानी को दंगों का मुख्य आरोपी बनाया था। लेकिन आज माया कोडनानी को बरी करने का फैसला सुनाया गया।
इन धाराओं के तहत चल रहा था मुकदमा
नरोदा ग्राम मामले (Gujarat Riots) में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना), 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा चल रहा था।
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