Sharad Pawar - NCP के प्रमुख शरद पवार ( Sharad Pawar ) ने कहा कि, आज की राजनीति ने अपनी शालीन भाषा खो दी है और आज जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता है वैसा पहले कभी सुनने को नहीं मिलता था।
राजनीति ने आज अपनी शालीन भाषा खो दी है - Sharad Pawar
आपको बता दें कि, यह बात पवार ने जब्बार पटेल द्वारा निर्देशित 1979 की मराठी फिल्म सिंहासन से संबंधित एक चर्चा में कही थी। NCP प्रमुख ने आगे कहा कि, राजनीति ने आज अपनी शालीन भाषा खो दी है। अब जिस अतिवादी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, वह अतीत में कभी भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा नहीं थी।
पहले की राजनीति अधिक शालीन थी
जब शरद पवार से पूछा गया कि, वह उस वक्त की किस चीज को याद करते हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, उन दिनों की राजनीति अधिक शालीन थी। आपको बता दें कि, जब फिल्म बनी थी तब शरद पवार महाराष्ट्र के सीएम थे। इस फिल्म की सूटिंग उस समय के मंत्रियों और विधायकों के बंगलों के अंदर करने की अनुमति दी थी।
पत्रकार कभी-कभी महसूस करते हैं वे सब कुछ जानते हैं
जब शरद पवार से पूछा गया कि, फिल्म में वह किस किरदार के साथ सबसे अधिक सहानुभूति रखते हैं, तो एनसीपी प्रमुख ने कहा कि, यह स्वर्गीय नीलू फुले द्वारा निभाई पत्रकार की भूमिका थी। उन्होंने आगे कहा कि, सरकार को कवर करने वाले पत्रकार कभी-कभी महसूस करते हैं कि, वे सब कुछ जानते हैं और उनमें से कुछ तो मंत्रियों और विधायकों के सलाहकार भी बन जाते हैं।
यह फिल्म 1970 के दशक की महाराष्ट्र की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती है
आपको बता दें कि, यह फिल्म पत्रकार-लेखक स्वर्गीय अरुण साधु द्वारा लिखे गए दो उपन्यासों - मुंबई दिनांक और सिम्हासन पर आधारित है, जबकि पटकथा स्वर्गीय विजय तेंदुलकर द्वारा लिखी गई थी। यह फिल्म 1970 के दशक की महाराष्ट्र की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती है।
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