केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे 8वें वेतन आयोग ने देशभर से सुझाव जुटाने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में आयोग की टीम लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता में क्षेत्रीय परामर्श बैठकों का आयोजन कर रही है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों, विभिन्न यूनियनों और सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी मांगों और सुझावों को सुना जाएगा।
लखनऊ से शुरू हुआ परामर्श अभियान
आयोग ने 22 और 23 जून 2026 को लखनऊ में दो दिवसीय बैठक आयोजित की है। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर में तथा 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में महत्वपूर्ण चर्चा सत्र आयोजित किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इन बैठकों में मिले सुझाव आयोग की अंतिम सिफारिशों को तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
फिटमेंट फैक्टर पर टिकी कर्मचारियों की नजर
सरकारी कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि नए वेतनमान की गणना इसी आधार पर होती है। यदि फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि होती है तो कर्मचारियों के मूल वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
महंगाई भत्ते को बेसिक पे में जोड़ने की मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ता (DA) को मूल वेतन में समाहित करने का सुझाव भी दिया है। हालांकि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव उसके विचाराधीन नहीं है। इसके बावजूद यह मुद्दा बैठकों में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।
पेंशन व्यवस्था में सुधार की उठ रही मांग
पेंशनर्स से जुड़े संगठनों ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने और पेंशन कम्यूटेशन के नियमों को सरल बनाने की मांग रखी है। इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले आर्थिक लाभों में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है। कई संगठनों का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में बदलाव समय की आवश्यकता है।
न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव
कुछ कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि न्यूनतम पेंशन को कर्मचारी के अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत के बराबर निर्धारित किया जाए। साथ ही उम्र बढ़ने के साथ इसमें चरणबद्ध बढ़ोतरी की व्यवस्था हो, ताकि 90 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर पेंशन अंतिम वेतन के बराबर हो सके।
वार्षिक वेतन वृद्धि बढ़ाने की भी मांग
रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसायटी ने आयोग को सौंपे ज्ञापन में वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा पेंशन कम्यूटेशन की बहाली अवधि को कम करने और नए मूल्य सूचकांक के आधार पर न्यूनतम वेतन तय करने की मांग भी उठाई गई है।
अंतिम सिफारिशों पर देशभर की नजर
8वें वेतन आयोग की इन क्षेत्रीय बैठकों को कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा, जिनका असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय पर पड़ सकता है।