New Delhi: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) देश में समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने के लिए दलीलें सुनने के लिए तैयार है, लेकिन क्या समाज इसके लिए तैयार है?
सिब्बल ने किया ये ट्वीट
सिब्बल ने ट्वीट किया 'समलैंगिक विवाह। सुप्रीम सुनने को तैयार है। क्या समाज सुनने के लिए तैयार है? कठिन!'
पांच-न्यायाधीशों की पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ - जिसमें मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस के कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हिमा कोहली शामिल हैं। देश में समान-लिंग विवाहों को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर मंगलवार को सुनवाई करने के लिए तैयार हैं।
सिब्बल ने ट्वीट किया 'समलैंगिक विवाह। सुप्रीम सुनने को तैयार है। क्या समाज सुनने के लिए तैयार है? कठिन!'
बड़ी बेंच ने इसे बताया मौलिक मुद्दा
यह इस मामले पर कम से कम 15 याचिकाओं के बाद आता है, जिन्हें पिछले महीने सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ द्वारा एक आधिकारिक निर्णय के लिए एक बड़ी बेंच को भेजा गया था, जिन्होंने इसे "बहुत ही मौलिक मुद्दा" कहा था।
RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले ने कही ये बात
वहीं, आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि विवाह एक अनुबंध नहीं, बल्कि एक संस्था है। यह आनंद का साधन नहीं है। समान लिंग के लोग अपने व्यक्तिगत हित के लिए शादी नहीं कर सकते । उन्होंने कहा कि विषम लिंग के लोग समाज के कल्याण के लिए शादी करते हैं, न कि व्यक्तिगत या शारीरिक यौन आनंद की पूर्ति के लिए।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस मांग के खिलाफ
समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी एनसीपीसीआर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उसने याचिका दाखिल कर कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम समलैंगिक युगलों द्वारा गोद लिए जाने को मान्यता नहीं देते।
आयोग ने कही ये बात
आयोग ने कहा कि समलैंगिक माता-पिता (Supreme Court) का दायरा पारंपरिक विषमलिंगी माता-पिता के मुकाबले सीमित हो सकता है। इससे बच्चों का दायर सीमित होगा और उनका व्यक्तित्व विकास भी प्रभावित होगा। अगर समलैंगिक युगलों को गोद लेने की अनुमति दी जाती है तो इससे बच्चों को खतरा हो सकता है।
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