New Delhi: 2047 में देश की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार (President Murmu) ने देश को पूरी तरह विकसित बनाने का लक्ष्य तय किया है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विजन : 2047' में सुविधायुक्त शहरों के साथ ही समग्र रूप से विकसित गांवों की परिकल्पना की गई है।
इन 25 वर्षों के लिए सतत विकास का लक्ष्य
आजादी के अमृत काल के इन 25 वर्षों के लिए सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण किया जा चुका है। अब पंचायतीराज मंत्रालय देश की हर ग्राम पंचायत को विकसित बनाने के लिए नए सिरे से रोडमैप बनाने जा रहा है, जिसके लिए पांच दिन तक मंथन चलेगा।
राष्ट्रपति मुर्मु ने किया सम्मेलन का शुभारंभ
बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Murmu) ने सोमवार को राष्ट्रीय पंचायत प्रोत्साहन सम्मेलन का शुभारंभ किया। इसी के साथ प्रोत्साहन पुरस्कारों का वितरण भी किया। अभी तक गांवों के विकास के लिए कई योजनाएं और अभियान चलाए जा चुके है। लेकिन शायद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए। अब इस दिशा में नए सिरे से प्रयास तेज किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा तय 17 सतत विकास लक्ष्यों को एकीकृत कर नौ लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
ये है 9 विकास के लक्ष्य
इन नौ सतत विकास लक्ष्यों पर राष्ट्रीय सम्मेलन- गरीबी मुक्त और उन्नत आजीविका- आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा- सुशासन- बाल हितैषी पंचायत- महिला हितैषी पंचायत- सामाजिक रूप से सुरक्षित पंचायत- पर्याप्त जल वाली पंचायत- स्वच्छ और हरित पंचायत- स्वस्थ पंचायत
"गांव के विकास से ही देश की समग्र प्रगति हो सकती है"
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार वितरण के दौरान कहा कि गांव के विकास से ही देश की समग्र प्रगति हो सकती है। ग्रामीणों को यह तय करने में सक्षम होना चाहिए कि विकास का कौन सा माडल उनके लिए उपयुक्त है और उसे कैसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि एक पंचायत के सर्वोत्तम तौर-तरीकों को दूसरी पंचायतों में अपनाकर हम तेजी से विकास कर सकते हैं।
आपसी सहमति से हो गांव के सभी सामुदायिक कार्य: राष्ट्रपति
पंचायत चुनावों से बढ़ने वाली आपसी कड़वाहट पर चिंता जताते हुए कहा कि चुनाव को लेकर ग्रामीणों में आपसी कलह न हो, इसलिए ही इन चुनावों को राजनीतिक दलों से अलग रखा गया है। राष्ट्रपति ने सलाह दी कि गांव में सभी सामुदायिक कार्य आपसी सहमति से होने चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री गिरिराज सिंह, राज्यमंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी उपस्थित थे।
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