Abhijeet Dipke Marriage News: नीट पेपर लीक और युवाओं के मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका आंदोलन नहीं, बल्कि उनकी शादी को लेकर आई खबरें हैं। अभिजीत दीपके के माता-पिता ने पहली बार उनकी शादी को लेकर खुलकर बात की है। परिवार का कहना है कि अभिजीत के लिए लगातार रिश्ते आ रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता देशहित से जुड़े कार्य और आंदोलन हैं। अंतिम फैसला अभिजीत स्वयं करेंगे।
शादी के लिए लगातार आ रहे हैं रिश्ते
अभिजीत दीपके की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही उनके लिए विवाह प्रस्तावों की संख्या भी बढ़ गई है। उनकी मां अनीता दीपके ने बताया कि CJP आंदोलन शुरू होने से पहले भी रिश्ते आते थे और अब भी लगातार प्रस्ताव मिल रहे हैं। परिवार चाहता है कि अभिजीत शादी कर लें, लेकिन किसी भी निर्णय का अधिकार उन्हीं के पास रहेगा। उन्होंने बताया कि जब अभिजीत अमेरिका के बोस्टन में थे, तब भी इस विषय पर चर्चा हुई थी, लेकिन उन्होंने केवल मुस्कुराकर बात टाल दी थी।
मां बोलीं- घर आने के बाद फिर होगी बातचीत
परिवार के अनुसार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और आंदोलन के अगले चरण के बाद अभिजीत के घर लौटने की योजना थी। हालांकि, टाइफाइड होने के कारण उनका घर लौटना कुछ दिनों के लिए टल गया। मां का कहना है कि जब वह घर आएंगे, तब परिवार एक बार फिर शादी के विषय पर उनसे बातचीत करेगा।
आंदोलन के दौरान परिवार को मिली थीं धमकियां
अभिजीत दीपके के आंदोलन के दौरान परिवार को सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उनकी मां ने बताया कि जब अभिजीत को विदेश में रहते हुए धमकियां मिलीं कि भारत में मौजूद उनके माता-पिता को निशाना बनाया जा सकता है, तब उन्होंने परिवार को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार लगभग दो सप्ताह तक कोंकण स्थित रिश्तेदारों के यहां रहा। परिवार को उनकी राजनीतिक पहल की जानकारी भी बाद में मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से मिली।
शांत स्वभाव से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर
परिवार का कहना है कि बचपन में अभिजीत बेहद शांत स्वभाव के थे। उन्होंने स्कूल के दिनों में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन आज वे राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न मंचों पर कई भाषाओं में अपने विचार रखते हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने अपने घर की पार्किंग में कई बेघर आदिवासी परिवारों को अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई थी।
इंजीनियरिंग छोड़ी, चुना अलग रास्ता
अभिजीत दीपके ने 10वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट अंक हासिल किए थे। इसके बाद उन्होंने परिवार की इच्छा पर इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन अंतिम परीक्षा से पहले पढ़ाई छोड़ दी। बाद में उनके माता-पिता ने भी स्वीकार किया कि उन पर इंजीनियरिंग करने का दबाव बनाना सही निर्णय नहीं था। परिवार के अनुसार, आंदोलन के दौरान जब उन पर स्याही फेंकी गई और हमला हुआ, तब वे काफी चिंतित थे। उस समय अभिजीत ने अपनी मां से कहा था कि अब उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि वे खुद को पूरे देश की जिम्मेदारी मानते हैं।