देश के दक्षिणी हिस्से में आज खास खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। बेंगलुरू में आज जीरो शैडो डे (Zero Shadow Day) का असर देखने को मिलेगा। आज कुछ समय के लिए बेंगलुरू में किसी भी आकृति की परछाई सीधे नहीं बनेगी। वैज्ञानिक भाषा में इसे जीरो शैडो डे कहते हैं। यह घटना दोपहर 12.17 बजे देखने को मिलेगी।
क्या होता है Zero Shadow Day ?
एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) के अनुसार, जीरो शैडो डे उस दिन को कहते है जिस दिन सूर्य आपके सिर के बिल्कुल ऊपर होगा। लेकिन उसकी वजह से आपकी छाया नहीं आएगी। ऐसी स्थिति में सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि चीजों की भी परछाई नहीं बनती है। जानकारी के अनुसार, वास्तविक घटना केवल एक सेकंड के एक अंश तक रहती है, लेकिन इसका असर करीब डेढ़ मिनट तक रहता है।
क्यों होती है जीरो शैडो की घटना
धरती का घूर्णन अक्ष सूर्य की तरफ लगभग 23.5 डिग्री पर झुका हुआ है। इस के प्रभाव से मौसम बनते और बदलते हैं। इसका अर्थ है कि सूरज, दिन के अपने उच्चतम पॉइंट पर, भूमध्य रेखा के 23.5 डिग्री दक्षिण से भूमध्य रेखा (उत्तरायण) के 23.5 डिग्री उत्तर की तरफ जाएगा, और फिर से एक साल में (दक्षिणायन) लौट आएगा। इसी घूर्णन प्रक्रिया के चलते, एक जीरो शैडो डे (Zero Shadow Day) तब आता है, जब सूर्य उत्तर की तरफ बढ़ता है, और दूसरा तब आता है, जब सूर्य दक्षिण की तरफ जाता है। इस तरह से साल में दो बार जीरो शैडो डे पड़ते हैं।

आकृति के नीचे बनती है परछाई
धरती पर कर्क रेखा और मकर रेखा पर हर वर्ष दो बार जीरो शैडो डे होता है। वर्ष में दो बार धरती पर सूरज की रोशनी बिल्कुल सीधे पड़ती है, जिसके चलते धरती पर किसी भी आकृति की परछाई नहीं बनती है। उदाहरण के तौर पर अगर जीरो शैडो डे के दिन किसी डंडे को जमीन पर बिल्कुल सीधा खड़ा करें तो इसकी परछाई जमीन पर नहीं नजर आएगी बल्कि जमनी के निचले सिरे के नीचे बनेगी।

Read More: माली सैनी समाज के आंदोलनकारी ने किया सुसाइड, नोट में लिखा- 12 प्रतिशत लेकर रहेंगे
Comments (0)