नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बहस की चुनौती पर पलटवार करते हुए उन्हें संसद में चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में बहस करना चाहते हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है, जहां राहुल गांधी आकर अपने मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। शाह के इस बयान ने दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव को एक बार फिर तेज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा का उचित मंच संसद है और विपक्ष को वहां अपनी बात रखनी चाहिए।
संसद के विशेष सत्र में एसआईआर पर बहस का प्रस्ताव
हरियाणा के करनाल में पदयात्रा के दौरान अमित शाह ने राहुल गांधी को सीधे चुनौती देते हुए विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मुद्दे पर बहस करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री को पत्र लिखें, जिसके बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। शाह के मुताबिक, सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और राहुल गांधी को सदन में आकर अपने सवाल रखने चाहिए। गृह मंत्री ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के बजाय सदन में हंगामा किया जाता है, जिससे लोकतांत्रिक विमर्श प्रभावित होता है।
सड़क पर बहस की चुनौती पर भी शाह का जवाब
राहुल गांधी की ओर से संसद से बाहर किसी भी मंच पर बहस करने की चुनौती दिए जाने के बाद अमित शाह ने हरियाणा में चौराहे पर चर्चा का विकल्प सामने रखा। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी सड़क पर ही बहस करना चाहते हैं, तो वे हरियाणा का कोई भी चौराहा चुन सकते हैं। वहां भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष चर्चा के लिए पहुंच जाएंगे। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाद में आएंगे, फिलहाल राहुल गांधी उनसे ही बहस कर सकते हैं। इस बयान के जरिए गृह मंत्री ने राहुल गांधी की चुनौती को स्वीकार करने का दावा करते हुए बहस के लिए अपनी ओर से अलग शर्त और मंच पेश किया।
कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप
करनाल में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस की संसदीय भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संसद में हंगामा करने को अपनी राजनीतिक कार्यशैली बना लिया है और महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा नहीं होने देती। शाह ने यह भी कहा कि अब सड़कों पर भीड़ जुटाकर अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, देश की जनता को यह तय करना चाहिए कि राष्ट्रीय समस्याओं और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विमर्श संसद में होना चाहिए या सड़कों पर। हालांकि, ये टिप्पणियां गृह मंत्री के राजनीतिक आरोप हैं और इस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री मोदी को राहुल गांधी ने दी थी खुली चुनौती
अमित शाह की प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी भी मंच पर सीधे बहस करने की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा था कि वे कोई भी जगह और मंच चुन सकते हैं। उन्होंने देशद्रोह, विदेशी ताकतों के साथ संबंधों और उन संबंधों की प्रकृति जैसे सवालों पर खुली चर्चा करने की बात कही थी। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि बहस के दौरान दोनों नेता, मीडिया और देश के युवा मौजूद रह सकते हैं। उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
राजनीतिक टकराव के बीच बहस के मंच पर सियासत
राहुल गांधी और अमित शाह के बीच बयानबाजी ने संसद और सड़क पर बहस के मंच को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। एक ओर राहुल गांधी प्रधानमंत्री को सीधे संवाद की चुनौती दे रहे हैं, वहीं अमित शाह संसद के विशेष सत्र में चर्चा का प्रस्ताव रख रहे हैं और सड़क पर बहस के लिए भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष का नाम आगे कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में एसआईआर का मुद्दा भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी शाह के प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या दोनों पक्ष किसी साझा मंच पर चर्चा के लिए तैयार होते हैं। फिलहाल, इस चुनौती और जवाबी चुनौती ने सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान को और मुखर कर दिया है।