हाल में जारी एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स (AMI) 2026 के अनुसार भारत 11 एशियाई देशों में छठे स्थान पर बना हुआ है। यह सूचकांक दर्शाता है कि भारत की बुनियादी आर्थिक मजबूती के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा में उसे अभी और तेज गति पकड़ने की जरूरत है। कई मोर्चों पर भारत अपने प्रमुख एशियाई प्रतिद्वंद्वियों से पीछे नजर आता है।
चीन शीर्ष पर, मलेशिया का बड़ा उछाल
हॉन्ग कॉन्ग स्थित कंसल्टिंग फर्म डेजन शिरा एंड एसोसिएट्स द्वारा लगातार तीसरे वर्ष जारी की गई इस रैंकिंग में चीन ने एक बार फिर पहला स्थान बरकरार रखा है। मलेशिया ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए वियतनाम को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि वियतनाम तीसरे पायदान पर खिसक गया है। यह बदलाव एशिया में बदलते मैन्युफैक्चरिंग समीकरणों को दर्शाता है।
विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी बढ़ी प्रतिस्पर्धा
सूची में सिंगापुर ने एक पायदान की छलांग लगाकर चौथा स्थान हासिल किया है और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ दिया है, जो अब पांचवें स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक तीव्र हो गई है, जहां नीति, नवाचार और बुनियादी ढांचे की भूमिका निर्णायक बन रही है।
भारत के बाद इंडोनेशिया और थाईलैंड की प्रगति
भारत के ठीक बाद इंडोनेशिया सातवें स्थान पर है। थाईलैंड ने दो पायदान की छलांग लगाकर आठवां स्थान प्राप्त किया है, जो उसके मैन्युफैक्चरिंग सुधारों का संकेत देता है। जापान नौवें, फिलीपींस दसवें और बांग्लादेश 11 देशों की सूची में अंतिम स्थान पर है।
आठ स्तंभों पर हुआ देशों का मूल्यांकन
एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में देशों का आकलन आठ प्रमुख स्तंभों—अर्थव्यवस्था, राजनीतिक जोखिम, व्यापार माहौल, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कर नीति, बुनियादी ढांचा, कार्यबल और नवाचार—के आधार पर किया गया है। कुल 43 उप-मापदंडों के साथ 100 अंकों के पैमाने पर स्कोर तय किया गया, जहां अधिक अंक बेहतर प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
भारत: मजबूत आधार, लेकिन ढांचागत चुनौतिया
रिपोर्ट के अनुसार भारत एक विरोधाभासी स्थिति में खड़ा है। एक ओर विशाल घरेलू बाजार, नीतिगत सुधारों की तेज रफ्तार और निवेश की संभावनाएं हैं, तो दूसरी ओर बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक जटिलताएं अब भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। यही कारण है कि छठा स्थान भारत की क्षमता को तो दर्शाता है, लेकिन उसकी सीमाओं को भी उजागर करता है।
सकारात्मक संकेत: अर्थव्यवस्था और कार्यबल की ताकत
अच्छी खबर यह है कि आर्थिक मजबूती के लिहाज से भारत का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। कुल अर्थव्यवस्था के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है और आर्थिक वृद्धि में उसे सबसे अधिक अंक मिले हैं। आर्थिक पैमाने के लिहाज से भारत केवल चीन से पीछे दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा कार्यबल के मामले में भारत ने सभी 11 देशों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है, जहां श्रम बल का आकार, जनसांख्यिकी, लागत और शिक्षा उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
भविष्य की राह: गति और सुधार दोनों जरूरी
बुनियादी ढांचे में भारत चौथे और नवाचार में पांचवें स्थान पर है, जो सरकार के प्रयासों से आगे और बेहतर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लॉजिस्टिक्स, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और निवेश-अनुकूल माहौल में सुधार तेज किया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में एशिया की मैन्युफैक्चरिंग रेस में कहीं ऊंचे पायदान पर पहुंच सकता है।
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