गुवाहाटी: असम के बेहद लोकप्रिय और दिवंगत गायक जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब उनकी एक तस्वीर (म्यूरल/भित्तिचित्र) को लेकर राज्य में एक नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। गुवाहाटी के गणेशगुड़ी फ्लाईओवर पर बने जुबीन गर्ग के एक म्यूरल को हाल ही में मिटा दिया गया, जिसके बाद से लगातार सवाल उठ रहे थे। अब इस पूरे विवाद पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने एक बड़ा और तीखा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने मशहूर वैश्विक क्रांतिकारी 'चे ग्वेरा' से लेकर प्रतिबंधित संगठन उल्फा (ULFA) के संस्थापक परेश बरुआ तक का जिक्र कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, बीते जून महीने में जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के असम दौरे (जो बाद में रद्द हो गया था) के मद्देनजर शहर के सौंदर्यीकरण का काम चल रहा था। इसी दौरान गणेशगुड़ी फ्लाईओवर पर बनी जुबीन गर्ग की एक खास पेंटिंग को सफेद रंग से मिटा दिया गया। इस पेंटिंग में जुबीन गर्ग को क्यूबा के क्रांतिकारी 'चे ग्वेरा' के लुक और अंदाज में दिखाया गया था। म्यूरल हटाए जाने के बाद जुबीन के प्रशंसकों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
"चे ग्वेरा क्यों? क्रांतिकारी की फोटो चाहिए तो परेश बरुआ की बनाओ"
शुक्रवार को गणेशगुड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इस विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार ने इस म्यूरल को हटाने का कोई सीधा आदेश नहीं दिया था, लेकिन जिन्होंने भी इसे मिटाया है, वे 'सच्चे असमिया' हैं।
मुख्यमंत्री शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा, "प्रसिद्ध दिवंगत कलाकार जुबीन गर्ग की तस्वीर को चे ग्वेरा जैसे विदेशी क्रांतिकारी की शैली में क्यों चित्रित किया जाना चाहिए? आप इस तरह से जुबीन की तस्वीर नहीं बना सकते। अगर उनकी तस्वीर बनानी ही है, तो केवल वैसी ही तस्वीर बनाई जा सकती है जिसे उनकी पत्नी ने मंजूरी दी हो।"
यही नहीं, मुख्यमंत्री ने आगे तंज कसते हुए कहा, "यदि आपको किसी क्रांतिकारी की ही तस्वीर बनानी है, तो उल्फा संस्थापक परेश बरुआ की तस्वीर बनाइए। वह पिछले 30 वर्षों से अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं। वह सही कर रहे हैं या गलत, यह एक अलग बहस का विषय है, लेकिन वह अपने परिवार से दूर रहकर यह संघर्ष कर रहे हैं।"
कलाकारों ने पुलिस को दिया बयान
मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि इस मामले में पुलिस ने जब जांच की, तो पेंटिंग मिटाने वाले दोनों कलाकारों ने थाने में लिखित बयान दिया है। दोनों चित्रकारों और काम का ठेका लेने वाले ठेकेदार का बचाव करते हुए सीएम ने कहा, "वे कोई मुस्लिम या बांग्लादेशी 'मिया' नहीं हैं, बल्कि वे पूरी तरह असमिया कलाकार हैं। वे खुद जुबीन के बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह म्यूरल ठीक से जुबीन गर्ग जैसा नहीं दिख रहा था, इसलिए उन्होंने खुद उसे मिटा दिया।" हालांकि, अब उसी जगह पर कलाकार ने जुबीन गर्ग की एक नई तस्वीर बना दी है, जिसमें 'चे ग्वेरा' की कोई झलक नहीं है, और इस नई तस्वीर पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है।
सिंगापुर में हुई थी जुबीन गर्ग की मौत
गौरतलब है कि पिछले साल 19 सितंबर (2025) को सिंगापुर में आयोजित 'नॉर्थ-ईस्ट फेस्टिवल' के दौरान स्कूबा डाइविंग करते समय असम के इस चहेते कलाकार जुबीन गर्ग की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी अचानक हुई मौत के पीछे गहरी साजिश की आशंका जताते हुए असम के मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन भी किया गया था। हालांकि, बाद में सिंगापुर की अदालत ने किसी भी तरह की 'साजिश की थ्योरी' को खारिज कर दिया था। अब उनकी मौत के महीनों बाद इस म्यूरल विवाद ने राज्य के सियासी पारे को एक बार फिर चढ़ा दिया है।