पश्चिम बंगाल में एक बार फिर 100 दिनों की रोजगार योजना नए स्वरूप में शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने इसे पहले से अधिक विस्तारित करते हुए 125 दिनों तक रोजगार देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को नवान्न में सभी विभागों के सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर इस योजना को 1 जुलाई से लागू करने की मंजूरी दे दी। साथ ही, योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई सख्त निर्देश भी जारी किए गए हैं।
1 जुलाई से शुरू होगी नई रोजगार योजना
जानकारी के मुताबिक, यूपीए सरकार के समय शुरू हुई 100 दिनों की रोजगार योजना (मनरेगा) को बंगाल में नए ढंग से लागू किया जाएगा। इस बार योजना को केवल 100 दिनों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि रोजगार अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। राज्य में इसे ‘जी राम जी’ नाम से लागू किया जाएगा। नवान्न में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि योजना का लाभ लेने वाले पात्र लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को अभी से तैयारी शुरू करनी होगी।
आधार और वोटर कार्ड होंगे अनिवार्य
राज्य सरकार ने इस योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सख्त पहचान प्रक्रिया लागू की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, योजना में काम पाने के लिए आधार कार्ड और वोटर कार्ड दोनों अनिवार्य होंगे। बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी आवेदक को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दस्तावेजों की जांच में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुराने भ्रष्टाचार की होगी दोबारा जांच
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन जिलों में पहले 100 दिनों की रोजगार योजना में भ्रष्टाचार और फर्जी जॉब कार्ड को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, उन मामलों की नए सिरे से जांच की जाए। सरकार पुराने रिकॉर्ड खंगालकर अनियमितताओं की समीक्षा करेगी ताकि नई योजना में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
केंद्र-राज्य विवाद के बीच रुकी थी योजना
गौरतलब है कि 100 दिनों की रोजगार योजना को लेकर पूर्व ममता बनर्जी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच लंबे समय तक राजनीतिक टकराव बना रहा था। केंद्र सरकार ने बंगाल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी जॉब कार्ड के आरोप लगाते हुए फंड रोक दिया था। वहीं, तत्कालीन राज्य सरकार का आरोप था कि केंद्र बकाया राशि रोककर राज्य के गरीब लोगों को रोजगार से वंचित कर रहा है।
‘कर्मश्री’ के बाद फिर लौट रही पुरानी योजना
केंद्र से फंड बंद होने के बाद राज्य सरकार ने विकल्प के तौर पर 'कर्मश्री’ योजना शुरू की थी, जिसमें जॉब कार्ड धारकों को सालाना 50 से 70 दिनों का रोजगार दिया जाता था। अब राजनीतिक बदलाव के बाद केंद्र की योजना के विस्तारित मॉडल को बंगाल में फिर से लागू किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी पहले से ज्यादा मजबूत होगी, जिससे जरूरतमंद लोगों को सीधे रोजगार का लाभ मिल सकेगा।