स्वतंत्रता दिवस से पहले भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। सीमा सुरक्षा बल ने सोमवार से जैसलमेर से सटी सीमा पर विशेष ‘ऑपरेशन अलर्ट’ शुरू किया है। यह अभियान 17 अगस्त तक जारी रहेगा और इसका उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सीमा पार से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि, घुसपैठ या तस्करी की कोशिश को समय रहते नाकाम करना है। रेगिस्तानी सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अग्रिम इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को सामान्य दिनों की तुलना में काफी मजबूत किया गया है।
बीएसएफ की निगरानी व्यवस्था में सीमा चौकियों पर जवानों की तैनाती बढ़ाने के साथ गश्त का दायरा भी बढ़ाया गया है। सुरक्षा बल का पूरा जोर इस बात पर है कि सीमा पार से होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सके। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी तरह की ढिलाई न हो, इसके लिए अधिकारियों ने अग्रिम क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण शुरू कर दिया है।
रेगिस्तान की गर्मी में जवानों का बढ़ा पहरा
जैसलमेर का सीमा क्षेत्र बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाला इलाका है। थार के रेगिस्तान में तेज गर्मी, धूलभरी हवाएं और दूर-दूर तक फैले रेतीले इलाके जवानों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा करते हैं। इसके बावजूद बीएसएफ के जवान अग्रिम चौकियों पर पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं। नहरी क्षेत्रों से लेकर रेतीले टीलों तक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और कई स्थानों पर जवानों की संख्या बढ़ाई गई है।
अग्रिम चौकियों पर नफरी बढ़ाने के साथ गश्त भी पहले की तुलना में अधिक सघन की गई है। सीमा की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऊंटों के जरिए होने वाली पारंपरिक गश्त जारी है, वहीं पैदल गश्त को भी बढ़ाया गया है। इससे सीमा के ऐसे हिस्सों पर निगरानी मजबूत करने में मदद मिलती है जहां वाहनों की आवाजाही या नियमित निगरानी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
रात में थर्मल इमेजर और नाइट विजन से निगरानी
ऑपरेशन अलर्ट के दौरान केवल मानव गश्त पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। रात के समय सीमा पार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नाइट विजन उपकरण और हैंड-हेल्ड थर्मल इमेजर का उपयोग किया जा रहा है। इन उपकरणों की मदद से अंधेरे में भी संदिग्ध गतिविधियों या मानव आवाजाही का पता लगाने की क्षमता बढ़ जाती है।
इसके अलावा हाईटेक ड्रोन डिटेक्शन प्रणाली को भी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सीमा क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए संभावित तस्करी या अन्य गतिविधियों की आशंका को देखते हुए उनकी पहचान और निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक उपकरणों और पारंपरिक सीमा गश्त के संयोजन से बीएसएफ संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा की कई परतें तैयार कर रही है।
घुसपैठ और तस्करी पर विशेष नजर
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा बलों की चिंता केवल संभावित घुसपैठ तक सीमित नहीं है। सीमा पार से हथियार, मादक पदार्थ या अन्य प्रतिबंधित सामान की तस्करी की कोशिशों को रोकना भी इस विशेष अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सीमा पर बढ़ी चौकसी के दौरान संदिग्ध गतिविधियों, अनधिकृत आवाजाही और संभावित तस्करी मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
जैसलमेर सेक्टर की सीमा लंबे रेगिस्तानी क्षेत्र में फैली होने के कारण सुरक्षा बलों के सामने निगरानी की अतिरिक्त चुनौती रहती है। ऐसे में अग्रिम चौकियों पर अतिरिक्त जवानों की मौजूदगी और लगातार गश्त का उद्देश्य किसी भी संभावित घुसपैठिए या तस्करी नेटवर्क को सीमा पार करते ही रोकना है। सुरक्षा बल स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के आधार पर निगरानी की रणनीति को लगातार मजबूत कर रहा है।
अधिकारी खुद ले रहे सुरक्षा व्यवस्था का जायजा
ऑपरेशन अलर्ट के दौरान वरिष्ठ अधिकारी भी अग्रिम सीमा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। वे चौकियों पर तैनात जवानों से सुरक्षा तैयारियों की जानकारी लेने के साथ निगरानी व्यवस्था और गश्त की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कर रहे हैं। संवेदनशील स्थानों पर तैनाती और निगरानी की व्यवस्था को लगातार परखा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
सीमा सुरक्षा बल के लिए यह अभियान केवल स्वतंत्रता दिवस के दिन की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। 17 अगस्त तक चलने वाले ऑपरेशन के दौरान सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी जारी रहेगी। इसका मकसद राष्ट्रीय पर्व के दौरान देश के भीतर सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के साथ सीमा पर किसी भी संभावित चुनौती का तुरंत जवाब देने के लिए बल को पूरी तरह तैयार रखना है।
तिरंगे के जश्न से पहले सरहद पर अभेद्य सुरक्षा
देश जब स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारी कर रहा है, उसी समय अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवान अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं। जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके में दिन की भीषण गर्मी से लेकर रात के अंधेरे तक सुरक्षा बल की निगरानी लगातार जारी रहेगी। ऊंटों और पैदल गश्त से लेकर थर्मल इमेजिंग और ड्रोन निगरानी तक, सुरक्षा के विभिन्न माध्यमों को एक साथ सक्रिय किया गया है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले शुरू किया गया यह विशेष अभियान इस बात का संकेत है कि सीमा सुरक्षा बल राष्ट्रीय पर्व के दौरान किसी भी तरह के सुरक्षा जोखिम को लेकर पूरी तरह सतर्क है। सीमा पर मजबूत पहरे और तकनीकी निगरानी के जरिए बीएसएफ का लक्ष्य यही है कि देश के नागरिक स्वतंत्रता दिवस समारोह को बिना किसी व्यवधान के मना सकें और सीमा पार से आने वाली किसी भी चुनौती को समय रहते निष्प्रभावी किया जा सके।