लखनऊ। उत्तरप्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच सोमवार को कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित किया। लखनऊ और नोएडा समेत प्रदेश के 30 से ज्यादा शहरों में बारिश दर्ज की गई। वहीं सहारनपुर में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। कई इलाकों में सड़कों और कॉलोनियों में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कई जिलों में पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर भी दिखाई दे रहा है। गंगा और यमुना समेत करीब 10 नदियां उफान पर हैं। फर्रुखाबाद और बिजनौर में गंगा का पानी हाईवे तक पहुंच गया है, जबकि कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
सहारनपुर में 24 घंटे से बारिश, नदियों में आया तेज सैलाब
सहारनपुर जिले में पिछले करीब 24 घंटे से रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। लगातार बारिश के कारण गंगराव नदी और शाकुंभरी मंदिर के आसपास बहने वाली बरसाती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया।पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि मिर्जापुर क्षेत्र में गंगराव नदी पर बना रपटा पुल बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। पुल का हिस्सा पानी के तेज बहाव में टूटकर बिखर गया, जिससे इलाके में आवागमन प्रभावित हुआ है।
दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर बहा नदी का पानी
सहारनपुर में बाढ़ का असर मुख्य मार्गों तक पहुंच गया है। गंगराव नदी का पानी दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे के ऊपर से बहने लगा। सड़क पर पानी आने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।कई निचले इलाकों में 3 से 4 फीट तक पानी जमा होने की जानकारी है। सड़कों और कॉलोनियों में जलभराव के कारण लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी परेशानी हो रही है।कई जगहों पर कार और बाइक पानी में आधी तक डूबी दिखाई दीं। घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों के सामान को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
पहाड़ों की बारिश का असर, 10 नदियां उफान पर
उत्तरप्रदेश में बाढ़ की स्थिति को पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश ने और गंभीर कर दिया है। गंगा और यमुना समेत करीब 10 नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।पश्चिमी और मध्य यूपी के कई जिलों में नदियों के किनारे बसे इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहना पड़ रहा है। नदी का पानी बढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों, सड़कों और संपर्क मार्गों पर पानी फैलने लगा है।
फर्रुखाबाद में गंगा का रौद्र रूप
फर्रुखाबाद में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। कई स्थानों पर नदी का पानी हाईवे के ऊपर से बह रहा है। बाढ़ के कारण करीब 40 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं।कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट गया है। कुछ गांवों के चारों तरफ पानी भर जाने से वे टापू जैसे नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने और रोजमर्रा की जरूरतों का इंतजाम करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
सड़क किनारे टेंट लगाकर रहने को मजबूर ग्रामीण
बाढ़ का पानी घरों और गांवों तक पहुंचने के बाद कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया है। कुछ ग्रामीण सड़क किनारे टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं।रात के समय भी कई परिवार खुले में या सड़क किनारे रात गुजार रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए ऐसी स्थिति और मुश्किल हो गई है।बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने भोजन, पीने का पानी, बिजली और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी जरूरतों की समस्या भी बढ़ सकती है।
फर्रुखाबाद में 21 घर गंगा में समाए
फर्रुखाबाद में गंगा के कटाव ने कई परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया है। जानकारी के मुताबिक अब तक 21 मकान गंगा नदी में समा चुके हैं।कटान का खतरा अभी भी कई घरों पर मंडरा रहा है। जिन मकानों के नदी में समाने की आशंका है, उनके लोग खुद ही घरों को तोड़ रहे हैं।मकान तोड़ने के पीछे ग्रामीणों की मजबूरी यह है कि वे ईंट, सरिया और दूसरी उपयोगी निर्माण सामग्री को बचा सकें। हालात सामान्य होने पर इन्हीं सामानों की मदद से दोबारा घर बनाने की उम्मीद है।
आशियाना टूटता देख छलक पड़े महिलाओं के आंसू
अपने हाथों से बनाए घर को टूटते देखना प्रभावित परिवारों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला पल है। फर्रुखाबाद में जब लोगों ने कटाव की जद में आए मकानों को तोड़ना शुरू किया तो कई महिलाएं अपने घरों को उजड़ता देख फूट-फूटकर रो पड़ीं।इन परिवारों के लिए मकान सिर्फ ईंट और दीवारों का ढांचा नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत और यादों से जुड़ा उनका आशियाना था। बाढ़ और कटाव ने उन्हें अपना घर बचाने और घर का सामान बचाने के बीच कठिन फैसला लेने पर मजबूर कर दिया है।
बिजनौर में भी हाईवे तक पहुंचा गंगा का पानी
फर्रुखाबाद के अलावा बिजनौर में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से परेशानी बढ़ी है। नदी का पानी कुछ स्थानों पर हाईवे तक पहुंच गया है। कई सड़क मार्ग जलमग्न होने से यातायात प्रभावित हुआ है।नदी किनारे रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान बढ़ाना पड़ सकता है।
बारिश ने बढ़ाई प्रशासन की चुनौती
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जिला प्रशासन के सामने राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत रखने की चुनौती बढ़ा दी है। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की आवाजाही, भोजन-पानी की व्यवस्था और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्राथमिकता बन गया है।वहीं, जिन सड़कों और पुलों पर पानी का तेज बहाव है, वहां हादसों को रोकने के लिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बहाव वाले रास्तों को पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
कई जिलों में बारिश का दौर जारी
सोमवार को लखनऊ और नोएडा समेत प्रदेश के 30 से ज्यादा शहरों में बारिश हुई। मौसम की सक्रियता के चलते आने वाले समय में भी कई इलाकों में बारिश और जलभराव की स्थिति बनी रह सकती है।सहारनपुर से लेकर फर्रुखाबाद और बिजनौर तक सामने आ रहे बाढ़ जैसे हालात बताते हैं कि पहाड़ी इलाकों में बारिश का सीधा असर मैदानी जिलों की नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है।फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है, जिनके घर बाढ़ और कटाव की चपेट में आ चुके हैं। फर्रुखाबाद में घरों को अपनी आंखों के सामने टूटता देख रहे परिवारों को राहत और पुनर्वास की तत्काल जरूरत है।