नई दिल्ली: छात्र-युवाओं के बीच पैठ मजबूत करने और उनका विश्वास जीतने के उद्देश्य से केंद्र सरकार जल्द ही ‘एक दिन, एक विश्वविद्यालय’ नामक नया कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस विशेष योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार के मंत्री अलग-अलग दिन विभिन्न विश्वविद्यालयों के परिसरों में जाकर छात्रों से सीधा संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं व चिंताओं को समझेंगे और सरकार की युवा-केंद्रित योजनाओं की जानकारी देंगे।
मंत्रियों को सौंपी गई समन्वय की जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, इस अभियान के सुचारू संचालन का जिम्मा नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री मनसुख मंडाविया को सौंपा गया है। ये दोनों मंत्री विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्रीय मंत्रियों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे और यह तय करेंगे कि कौन-सा मंत्री किस दिन किस विश्वविद्यालय का दौरा करेगा।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और राजनीतिक घटनाक्रम
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में गैर-राजनीतिक मंच 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के आह्वान पर हुए बड़े छात्र प्रदर्शन के बाद यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद से ही केंद्र सरकार लगातार युवाओं से जुड़ने के प्रयासों में जुटी है, जिसकी झलक लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भी देखने को मिली थी।
विपक्ष का पलटवार: 'छात्रों की गूंज' का विस्तार
दूसरी ओर, जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के बाद कांग्रेस ने भी युवाओं तक पहुंचने के प्रयासों को तेज कर दिया है। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का दायरा देश के 800 छोटे और मध्यम शहरों तक बढ़ाने का फैसला किया गया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा इस अभियान के प्रभाव की समीक्षा करने के सुझाव के बीच विपक्षी दल ने इस पहल को और मजबूत करने की रणनीति बनाई है। ऐसे में युवाओं का भरोसा जीतने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई राजनीतिक होड़ देखने को मिल रही है।